अलवर में 90 वर्षीय पंच को अंतिम विदाई, वीडियो में देखें हाथी पर निकली भव्य शव यात्रा, गाड़ियां लोहार समाज ने निभाई परंपरा
राजस्थान के अलवर जिले में गुरुवार रात एक अनोखी और भव्य शव यात्रा देखने को मिली, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गाड़ियां लोहार समाज के 90 वर्षीय पंच के निधन पर परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ हाथी पर शव यात्रा निकाली गई। इस अंतिम यात्रा की खास बात यह रही कि जयपुर से विशेष रूप से सुसज्जित हाथी मंगवाया गया था, जिस पर पंच का पार्थिव शरीर रखा गया। पूरे सम्मान और सामाजिक एकता के साथ निकाली गई इस शव यात्रा में समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार, दिवंगत पंच अलवर शहर के जागा सूर्य नगर डी-ब्लॉक क्षेत्र के निवासी थे। उनके निधन के बाद समाज की परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार को पूरे मान-सम्मान के साथ संपन्न करने का निर्णय लिया गया। इसी के तहत गुरुवार रात उनके निवास स्थान से एन.ई.बी. श्मशान घाट तक हाथी पर शव यात्रा निकाली गई।
शव यात्रा में हाथी के पीछे घोड़े, ऊंट, डीजे वाहन और बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल रहे। डीजे पर पारंपरिक संगीत बजता रहा, वहीं गाड़ियां लोहार समाज के युवक नाचते-गाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान माहौल भावुक होने के साथ-साथ समाज की एकजुटता और परंपराओं का प्रतीक भी बना रहा। रास्ते में शव यात्रा को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कई जगह लोगों ने रुककर अंतिम दर्शन किए।
इस पूरे आयोजन पर करीब 3 लाख रुपए का खर्च आया, जिसे गाड़ियां लोहार समाज के लोगों ने आपसी सहयोग से एकत्र किया। समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। समाज में यह मान्यता है कि किसी भी सदस्य के निधन पर पूरा समाज एक परिवार की तरह साथ खड़ा होता है, ताकि अंतिम संस्कार में आर्थिक कारण कोई बाधा न बने और दिवंगत को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी जा सके।
समाज के लोगों ने बताया कि पंच का समाज में विशेष सम्मान था। वे लंबे समय तक समाज के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते रहे और उनके निर्णयों को सभी मानते थे। इसी कारण उनके निधन पर समाज ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया कि उनकी अंतिम यात्रा विशेष और यादगार होनी चाहिए। जयपुर से हाथी मंगवाने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक, सभी तैयारियां समाज के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर कीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब परंपराएं धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं, ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक पहचान और आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं। गाड़ियां लोहार समाज की यह परंपरा न सिर्फ सामाजिक एकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समाज अपने बुजुर्गों और मार्गदर्शकों को कितना सम्मान देता है।
