बंजर जमीन में जीरा-सरसों की कम खर्च में खेती से लाखों की कमाई, 50 गांवों में सफल मॉडल
राजस्थान के किसानों के लिए बंजर और कम उपजाऊ जमीन भी अब सोने में बदल सकती है। जिले के 50 गांवों में किसानों ने कम खर्च और वैज्ञानिक तरीके से जीरा और सरसों की खेती कर लाखों रुपए की कमाई की है। इस सफलता के पीछे मुख्य कारण है ढेंचा तकनीक और उर्वरकता बढ़ाने वाले उपायों का इस्तेमाल।
किसानों ने परंपरागत खेती से हटकर कम लागत में अधिक उत्पादन के तरीकों को अपनाया। बंजर और सूखी जमीन में उपयुक्त फसलों का चयन किया गया और ढेंचा (हरी खाद) लगाकर मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाई गई। इसके साथ ही सिंचाई और पोषण के लिए न्यूनतम संसाधनों का इस्तेमाल किया गया, जिससे लागत कम और लाभ अधिक हुआ।
इस पहल के तहत किसानों ने जीरा और सरसों की बुआई की। हल्की मिट्टी और कम पानी में भी ये फसलें अच्छी पैदावार देती हैं। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, ढेंचा लगाने से न केवल मिट्टी की नाइट्रोजन क्षमता बढ़ती है, बल्कि भूमि की संरचना भी मजबूत होती है।
किसानों के अनुभव बताते हैं कि पहले बंजर माने जाने वाले खेतों में अब अच्छी उपज हो रही है। एक किसान ने बताया कि “हमने कम लागत में जीरा और सरसों की खेती शुरू की, और इस साल हमें लाखों रुपए की आमदनी हुई। यह तकनीक हमारे लिए वरदान साबित हुई।”
50 गांवों में इस मॉडल ने किसान समुदाय में उत्साह और आत्मनिर्भरता बढ़ाई है। स्थानीय कृषि विभाग भी इस पहल को बढ़ावा दे रहा है और अन्य किसानों को भी इसी तकनीक को अपनाने की सलाह दे रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मॉडल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाते हैं, बल्कि सूखी और कम उपजाऊ जमीन के उपयोग को भी कारगर बनाते हैं।
इस पहल से यह संदेश जाता है कि सही तकनीक, कम लागत और वैज्ञानिक खेती से बंजर जमीन भी लाभकारी बन सकती है। भविष्य में ऐसे प्रयोग और बढ़ाए जाने की संभावना है, जिससे राज्य में किसानों की आय बढ़े और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिले।
