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कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में 200 करोड़ का कारोबार, 26 दिन में 26 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे; रावण दहन और पंजाबी नाइट में उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़

कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में 200 करोड़ का कारोबार, 26 दिन में 26 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे; रावण दहन और पंजाबी नाइट में उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़
 
कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में 200 करोड़ का कारोबार, 26 दिन में 26 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे; रावण दहन और पंजाबी नाइट में उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़

हाड़ौती की सांस्कृतिक पहचान और देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाले कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का रंगारंग समापन हो गया है। इस बार 26 दिनों तक चले मेले में मनोरंजन के साथ कारोबार भी खूब हुआ। अनुमान के मुताबिक, मेले में करीब 200 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ, जबकि पूरे आयोजन के दौरान 26 लाख से ज्यादा लोग मेला परिसर पहुंचे। हर दिन एक लाख से अधिक लोगों की मौजूदगी ने मेले की रौनक बढ़ाई।

मेले की शुरुआत में भीड़ अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, लोगों की संख्या बढ़ती गई। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने खान-पान, खरीदारी और मनोरंजन का जमकर आनंद लिया। स्थानीय लोगों के साथ दूसरे शहरों से आए मेहमानों ने भी मेले में समय बिताया।

रावण दहन और पंजाबी नाइट में उमड़ा जनसैलाब

इस बार मेले के सबसे बड़े आकर्षणों में रावण दहन और पंजाबी नाइट शामिल रहे। इन आयोजनों के दौरान मेला परिसर में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग इन कार्यक्रमों को देखने पहुंचे। रावण दहन के आयोजन ने जहां दशहरा उत्सव का पारंपरिक रंग जमाया, वहीं पंजाबी नाइट ने संगीत और मनोरंजन के शौकीनों को आकर्षित किया।

इन विशेष आयोजनों के कारण मेले में लोगों की आवाजाही बढ़ी और पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। आयोजनों ने मेले को खास पहचान देने के साथ दर्शकों के लिए यादगार अनुभव भी तैयार किया।

कपड़े, चूड़ियां और घरेलू सामान की खूब हुई बिक्री

26 दिनों तक चले मेले ने व्यापारियों को भी कारोबार का बड़ा अवसर दिया। अनुमान के मुताबिक, इस साल करीब 200 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। मेले में कपड़ों, सजावटी सामान, क्रॉकरी, चूड़ियों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों पर ग्राहकों की अच्छी भीड़ रही।

लोगों ने त्योहारों और घरेलू जरूरतों के लिए जमकर खरीदारी की। मेले में स्थानीय व्यापारियों के साथ बाहर से आए दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें लगाई थीं। ग्राहकों की लगातार आवाजाही से दुकानदारों को कारोबार करने का अच्छा मौका मिला।

मनोरंजन और व्यापार का बड़ा मंच बना मेला

कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला हाड़ौती क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल आयोजित होने वाले इस मेले में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी होती हैं। इस बार भी 26 दिनों तक चले आयोजन में मनोरंजन, खान-पान और खरीदारी का संगम देखने को मिला।

शुरुआती दिनों में कम भीड़ के बाद अंतिम दिनों तक मेले में लोगों का उत्साह बना रहा। 26 लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी और करीब 200 करोड़ रुपए के अनुमानित कारोबार ने इस बार के आयोजन को खास बना दिया। रंगारंग कार्यक्रमों और व्यापारिक गतिविधियों के साथ 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का समापन हुआ।