खोह नागोरियान पटाखा फैक्ट्री हादसा: एक महीने बाद भी तय नहीं हो पाया जमीन का मालिकाना हक
खोह नागोरियान स्थित रहीम नगर तलाई में 9 जून को हुई पटाखा फैक्ट्री की भीषण आग को एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे वाली बस्ती की जमीन सरकारी है या निजी खातेदारी कृषि भूमि। इस मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।
पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 8 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण की स्थिति की जांच शुरू की थी। लेकिन एक महीने बाद भी करीब 700 से अधिक मकानों वाली इस बस्ती की भूमि स्थिति को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
JDA अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र के राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि जिस जमीन पर बस्ती बसी हुई है, वह सरकारी भूमि के अंतर्गत आती है या फिर निजी खातेदारी कृषि भूमि है।
जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण प्रशासन के सामने आगे की कार्रवाई को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। यदि जमीन सरकारी पाई जाती है तो अतिक्रमण और नियमन से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जबकि निजी भूमि होने की स्थिति में अलग प्रक्रिया अपनानी होगी।
हादसे के बाद सामने आया था कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री संचालित हो रही थी। आग लगने के बाद सुरक्षा मानकों और अवैध गतिविधियों को लेकर कई सवाल उठे थे। प्रशासन ने इसके बाद क्षेत्र में जांच और निगरानी बढ़ाने की बात कही थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस इलाके में रह रहे हैं और जमीन की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, हादसे के बाद प्रभावित परिवारों और आसपास के लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
JDA की ओर से अब राजस्व विभाग के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जमीन के वास्तविक स्वरूप को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद उठे सवालों के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता करना है कि बस्ती किस जमीन पर बसी है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
