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बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव तीसरे दिन भी जारी, राजनीतिक और सामाजिक समर्थन बढ़ा

बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव तीसरे दिन भी जारी, राजनीतिक और सामाजिक समर्थन बढ़ा
 
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव तीसरे दिन भी जारी, राजनीतिक और सामाजिक समर्थन बढ़ा

राजस्थान के बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी (Khejri) को बचाने के लिए चल रहा जन-आंदोलन अब एक विशाल रूप ले चुका है। सोमवार से शुरू हुआ यह 'खेजड़ी बचाओ महापड़ाव' आज अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया है और आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर भारी समर्थन मिल रहा है।

आंदोलन की शुरुआत पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय बिश्नोई समुदाय के आह्वान पर हुई थी। उनका मुख्य उद्देश्य है कि खेजड़ी वृक्ष की कटाई पर रोक लगे और इसके संरक्षण के लिए कानून बनाया जाए। बीकानेर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग महापड़ाव में शामिल हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, दूसरे दिन से ही इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारी संगठनों से मुलाकात की और खेजड़ी के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया। नेताओं ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण राजनीतिक मुद्दों से ऊपर है।

स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि खेजड़ी वृक्ष राजस्थान के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम है। यह वृक्ष न केवल रेगिस्तानी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकता है, बल्कि पशुपालन और स्थानीय कृषि के लिए भी पोषण और छाया प्रदान करता है। ऐसे में इस आंदोलन को समाज और राजनीति दोनों स्तरों से समर्थन मिलना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

महापड़ाव के तीसरे दिन भी सैकड़ों लोगों की उपस्थिति देखी गई। आंदोलनकारी आमरण अनशन और पदयात्रा जैसी गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को निगरानी में रखा है और आंदोलन की शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन सामाजिक चेतना और राजनीतिक दबाव दोनों पैदा कर रहा है। यदि राज्य सरकार खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाती है, तो यह न केवल पर्यावरण हितैषी कदम होगा, बल्कि बीकानेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में स्थानीय जीवन और कृषि के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।

इस प्रकार बीकानेर में चल रहा खेजड़ी बचाओ महापड़ाव तीसरे दिन भी जोरशोर से जारी है, और यह आंदोलन राजनीतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश दे रहा है कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा अब जनता और नेताओं की प्राथमिकता बन चुकी है।