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बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ ने पकड़ा जोर, अनशनकारियों की बिगड़ी तबीयत से प्रशासन में हड़कंप

बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ ने पकड़ा जोर, अनशनकारियों की बिगड़ी तबीयत से प्रशासन में हड़कंप
 
बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ ने पकड़ा जोर, अनशनकारियों की बिगड़ी तबीयत से प्रशासन में हड़कंप

बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में शुरू हुआ यह जन आंदोलन दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है। आंदोलन को लगातार सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। वहीं बुधवार को अनशन पर बैठे कई लोगों की तबीयत बिगड़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

शहर और आसपास के क्षेत्रों में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में पिछले कई दिनों से धरना-प्रदर्शन और अनशन जारी है। प्रदर्शनकारी खेजड़ी वृक्षों को बचाने और प्रस्तावित कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय क्षेत्र की जीवनरेखा है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

बुधवार को अनशन के दौरान कई लोगों को चक्कर आने, कमजोरी और स्वास्थ्य संबंधी अन्य परेशानियां होने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर मौके पर मौजूद चिकित्साकर्मियों ने प्राथमिक उपचार दिया, जबकि कुछ अनशनकारियों को अस्पताल भी ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सतर्क हो गईं।

आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा मौजूद रहे। लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि खेजड़ी की कटाई से जुड़े सभी आदेश तत्काल रद्द किए जाएं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिलने से आंदोलन को और मजबूती मिली है। कई नेताओं ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से समाधान निकालने की अपील की। इससे आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि खेजड़ी का पेड़ मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पशुओं के चारे और स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में इसकी अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण और जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आंदोलनकारियों से वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

फिलहाल, ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ बीकानेर में जनआंदोलन का रूप ले चुका है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान किस तरह निकालते हैं।