जयपुर के कलाकार मुकेश शर्मा की कला का जलवा, वीडियो में देंखे नीम करोली बाबा पर बनी पेंटिंग फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखाई गई
जयपुर के समकालीन कलाकार मुकेश शर्मा इन दिनों अपनी अनोखी कलाकृति को लेकर चर्चा में हैं। उनकी बनाई गई नीम करोली बाबा की पेंटिंग फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखाई गई है। खास बात यह है कि फिल्म में न केवल उनकी कलाकृति को जगह दी गई है, बल्कि पेंटिंग के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को भी दिखाया गया है। फिल्म के अंत में मुकेश शर्मा को विशेष क्रेडिट देकर सम्मानित किया गया है। मुकेश शर्मा की यह कलाकृति किसी सामान्य फिल्मी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह तकनीक, आध्यात्मिकता और समकालीन कला के मेल की तलाश के दौरान फिल्म निर्माताओं तक पहुंची।
तकनीक और आध्यात्मिकता के मेल से बनी पहचान
जयपुर निवासी मुकेश शर्मा वर्तमान में दिल्ली में रहकर अपनी कला साधना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म के निर्माता ऐसे कलाकारों की तलाश कर रहे थे, जिनकी कला में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ ऊर्जा, चेतना और आध्यात्मिक सोच दिखाई देती हो।इसी खोज के दौरान निर्माताओं की नजर उनके काम पर पड़ी। उनकी कला में आधुनिक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विषयों का अनोखा संयोजन देखने को मिलता है।
वेनिस में देखी गई थी ‘नागराज’ कलाकृति
मुकेश शर्मा ने बताया कि फिल्म निर्माताओं ने उनकी विशाल स्कल्प्चरल इंस्टॉलेशन ‘नागराज’ को वेनिस, इटली में देखा था। इस कलाकृति ने उन्हें काफी प्रभावित किया।इसके बाद निर्माताओं ने मुकेश शर्मा के अन्य कामों को समझा और नीम करोली बाबा पर आधारित पेंटिंग के लिए उनसे संपर्क किया।
फिल्म में दिखी पेंटिंग बनाने की प्रक्रिया
मुकेश शर्मा की बनाई गई नीम करोली बाबा की पेंटिंग को फिल्म में विशेष स्थान दिया गया है। फिल्म में दर्शकों को यह भी दिखाया गया है कि इस कलाकृति को तैयार करने के पीछे कलाकार की सोच, मेहनत और रचनात्मक प्रक्रिया क्या रही।कलाकार के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि उनकी कला को सिर्फ पर्दे पर दिखाया नहीं गया, बल्कि उसके पीछे की भावना और यात्रा को भी दर्शाया गया।
समकालीन कला में नई पहचान बना रहे मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा लंबे समय से समकालीन कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी कलाकृतियों में तकनीक, प्रकृति, आध्यात्मिकता और आधुनिक जीवन के बीच संबंधों को दर्शाने का प्रयास दिखाई देता है।उनका मानना है कि कला केवल देखने की चीज नहीं होती, बल्कि वह विचारों और भावनाओं को जोड़ने का माध्यम भी होती है।फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनकी कलाकृति को मिली जगह ने जयपुर की कला परंपरा और समकालीन कलाकारों को एक नई पहचान दी है। उनकी यह उपलब्धि कला और सिनेमा के अनोखे संगम के रूप में देखी जा रही है।
