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श्रावण के अंतिम रविवार को भोले के रंग में रंगा जयपुर, दो मिनट के वीडियो में देखें हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा गलता तीर्थ

श्रावण के अंतिम रविवार को भोले के रंग में रंगा जयपुर, दो मिनट के वीडियो में देखें हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा गलता तीर्थ
 
श्रावण के अंतिम रविवार को भोले के रंग में रंगा जयपुर, दो मिनट के वीडियो में देखें हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा गलता तीर्थ

श्रावण मास के अंतिम रविवार को छोटी काशी कहलाने वाले जयपुर में शिवभक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली। गलता तीर्थ से लेकर चारदीवारी क्षेत्र तक हर तरफ कांवड़ यात्राओं की धूम रही। शिवभक्तों की टोलियां ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ नगर भ्रमण पर निकलीं, जिससे पूरा शहर शिवमय नजर आया।

जयपुर के गलता तीर्थ से रविवार अलसुबह ही कांवड़िए जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए रवाना हुए। भक्तों की भीड़ ने गलता के पवित्र घाटों से निकलकर शहर के प्रमुख बाजारों से होती हुई शिवालयों की ओर रुख किया। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में पंचरंगिया निशान और सिर पर गंगाजल से भरी कांवड़ लिए नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। गलता गेट, सूरजपोल बाजार, रामगंज बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार और छोटी चौपड़ जैसे इलाकों में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा रहा।

इस दौरान जयपुर की ऐतिहासिक चारदीवारी पूरी तरह से भक्ति और आस्था के रंग में रंगी नजर आई। हर शिवालय को फूलों से सजाया गया था और मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थानीय लोगों द्वारा जगह-जगह जल, फल, शरबत और चाय के स्टॉल लगाए गए। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ शिवभक्ति में भागीदारी निभाई।

सावन के अंतिम सोमवार से ठीक एक दिन पहले रविवार को जयपुर में आस्था, भक्ति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला। कई कांवड़ यात्राएं देशभक्ति गीतों के साथ निकलीं, जिनमें तिरंगे के साथ शिव के झंडे लहराते नजर आए। डीजे की धुन पर भक्तों ने भोलेनाथ के भजनों पर थिरकते हुए यात्रा को उत्सव का रूप दे दिया।

पुलिस और प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम और सुरक्षित रहे। चिकित्सा विभाग द्वारा भी कांवड़ यात्रियों के लिए चिकित्सा शिविर लगाए गए।

गलता तीर्थ से निकली इस कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जयपुर केवल कला और संस्कृति की राजधानी ही नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था की भी अद्वितीय नगरी है। श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और पूरे वातावरण में गूंजते जयकारों ने श्रावण मास के समापन से पहले एक ऐतिहासिक दृश्य प्रस्तुत किया।