जयपुर के लॉ कॉलेज प्रिंसिपल पर पूर्व छात्र को धमकी देने का आरोप, वीडियो में देंखे पुलिस जांच में जुटी
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सुबोध लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल गौरव कटारिया विवादों में घिर गए हैं। कॉलेज के एक पूर्व छात्र ने उन पर फोन पर अभद्र व्यवहार करने और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर छात्र ने मानसरोवर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी लिखित शिकायत भेजी गई है।शिकायतकर्ता दिव्यांश गुप्ता के अनुसार, उन्हें कॉलेज के एक अनऑफिशियल ग्रुप के जरिए दीक्षांत समारोह की सूचना मिली थी। इसी संबंध में जानकारी लेने के लिए उन्होंने सुबह करीब साढ़े 9 बजे कॉलेज प्रिंसिपल गौरव कटारिया को फोन किया। हालांकि उस समय फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद दिव्यांश ने प्रिंसिपल को वॉट्सएप पर मैसेज भेजकर समारोह से जुड़ी जानकारी मांगी।
दिव्यांश का आरोप है कि मैसेज भेजने के कुछ समय बाद प्रिंसिपल गौरव कटारिया ने उन्हें फोन किया और बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। छात्र का कहना है कि फोन पर उन्हें धमकाते हुए कहा गया, “इतने जूते मारूंगा कि कोई गिनने वाला नहीं मिलेगा।” इस कथित बातचीत के बाद छात्र मानसिक रूप से परेशान हो गया और उसने मामले की शिकायत पुलिस से करने का फैसला लिया।पूर्व छात्र ने मानसरोवर थाने में शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक और शिक्षा विभाग को भी लिखित रूप में पूरा मामला बताया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख द्वारा इस तरह की भाषा और व्यवहार बेहद आपत्तिजनक है और इससे छात्रों के बीच गलत संदेश जा रहा है।
मामले के सामने आने के बाद कॉलेज और शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस कॉल डिटेल्स, वॉट्सएप मैसेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही दोनों पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
फिलहाल कॉलेज प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कॉलेज स्तर पर भी पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों में संवाद और अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक गंभीर मामला माना जाएगा। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों ही मामले की जांच में जुटे हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयान के बाद पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकतीहै।
