सिविल मामलों में FIR पर जयपुर हाईकोर्ट सख्त, DGP को नए निर्देश जारी करने के आदेश
जयपुर हाईकोर्ट ने सिविल प्रकृति के मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपसी लेनदेन, जमीन-जायदाद और कॉमर्शियल विवाद जैसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी की जा रही है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है। साथ ही, इन निर्देशों के अनुपालन के लिए डीजीपी स्तर पर भी सर्कुलर जारी किए गए हैं। इसके बावजूद यदि सिविल नेचर के मामलों में एफआईआर दर्ज हो रही है, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
इस मामले में राजीव कुमार शर्मा को निर्देश देते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि वे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सिरे से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। अदालत ने यह आदेश 18 अप्रैल को सुनवाई के दौरान दिए।कोर्ट ने आगे कहा कि डीजीपी इस बात की भी जांच करें कि पहले से जारी सर्कुलर की पालना क्यों नहीं हो रही है। साथ ही, जिन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की है, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को पुलिस प्रशासन के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल और क्रिमिनल मामलों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना न्याय व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। फिलहाल, इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
