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जयपुर में 250 से 150 वार्ड हुए; 100 वार्ड घटे, फिर भी निर्दलीयों का वर्चस्व

जयपुर में 250 से 150 वार्ड हुए; 100 वार्ड घटे, फिर भी निर्दलीयों का वर्चस्व
 
जयपुर में 250 से 150 वार्ड हुए; 100 वार्ड घटे, फिर भी निर्दलीयों का वर्चस्व

जयपुर नगर निगम के चुनावी नक्शे में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला। ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम को मिलाकर एकीकृत जयपुर नगर निगम बनाया गया और परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 250 से घटकर 150 रह गई। यानी शहर में पार्षदों की 100 सीटें कम हो गईं। इसके बावजूद चुनाव परिणामों में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रही।

2020 में जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम के कुल 250 वार्ड थे। उस चुनाव में 23 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर पार्षद बने थे। 2026 में वार्डों की संख्या 150 होने के बाद 15 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। संख्या के लिहाज से निर्दलीय पार्षदों की संख्या आठ कम हुई, लेकिन कुल वार्डों के अनुपात में उनकी हिस्सेदारी करीब 9.2 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 10 प्रतिशत हो गई।

700 से ज्यादा निर्दलीय मैदान में उतरे

इस बार जयपुर के 150 वार्डों में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। चुनाव से पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक 1,253 प्रत्याशियों में 953 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें कई ऐसे प्रत्याशी भी शामिल थे, जो पहले भाजपा या कांग्रेस से जुड़े रहे थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे।

परिसीमन के कारण पुराने वार्डों की सीमाएं और राजनीतिक समीकरण बदल गए। कई पूर्व पार्षदों के इलाके नए वार्डों में चले गए और बड़ी संख्या में पुराने चेहरों को इस बार टिकट नहीं मिला। भाजपा और कांग्रेस के कई दावेदारों के निर्दलीय चुनाव लड़ने से दोनों प्रमुख दलों के सामने बागियों को संभालने की चुनौती भी रही।

2026 में भाजपा को बहुमत

जयपुर नगर निगम के 2026 चुनाव परिणाम में भाजपा ने 78 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 53 सीटें मिलीं। निर्दलीय प्रत्याशी 15 वार्डों में विजयी रहे। उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार किया।

इस बार निर्दलीयों की संख्या इतनी नहीं है कि वे निगम में बहुमत के लिए आवश्यक भूमिका निभाएं, लेकिन 15 पार्षद अलग-अलग वार्डों के स्थानीय मुद्दों को लेकर अपनी भूमिका निभा सकते हैं। 2020 में स्थिति अलग थी। उस समय खासकर जयपुर हेरिटेज निगम में कांग्रेस को 47 और भाजपा को 42 सीटें मिली थीं, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद जीते थे। बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत थी, जिससे निर्दलीयों का महत्व बढ़ गया था।

परिसीमन ने बदली स्थानीय राजनीति

जयपुर में वार्डों की संख्या घटाने का असर केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहा। परिसीमन के कारण वार्डों की भौगोलिक सीमाएं भी बदलीं। पुराने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव हुआ और कई दावेदारों के सामने नए इलाकों में जाकर चुनाव लड़ने की चुनौती आई।

इसके अलावा आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव हुआ। 150 वार्डों में 20 अनुसूचित जाति, 6 अनुसूचित जनजाति, 30 अन्य पिछड़ा वर्ग और 94 सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए थे। इनमें 50 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रहे।

इस तरह जयपुर के 2026 नगर निगम चुनाव ने एक ओर 250 से घटकर 150 वार्डों वाला नया राजनीतिक ढांचा सामने रखा, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी भी दिखाई। अंतिम परिणाम में 15 निर्दलीयों की जीत हुई। ऐसे में जयपुर की स्थानीय राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, भले ही इस बार निगम में सत्ता का समीकरण बहुमत के साथ स्पष्ट हो गया हो।