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jaipur जिस देशी घी को मिलावटी मान किया था जब्‍त, अब विभाग ही कमाई के लिए करने जा रहा नीलाम
 

जयपुर न्यूज़ डेस्क, 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत नकली व मिलावटी बताकर जब्त किए गए देसी घी से अब चिकित्सा विभाग की कमाई होने जा रही है. मामला भीलवाड़ा जिले का है। जहां जब्त 2 हजार 890 लीटर कथित देशी घी की नीलामी कर विभाग कमाई करने जा रहा है.मिली जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा जिले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत नकली व मिलावटी सामान जब्त किया है. जिसमें 2 हजार 890 लीटर देशी घी भी शामिल है। विभाग ने इस देसी घी को 'श्रीपाल मार्क' से नीलाम करने की तैयारी कर ली है।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग 28 नवंबर को इस घी की नीलामी करने जा रहा है। जिसके लिए न्यूनतम तीन लाख रुपये कीमत तय की गई है। हालांकि विभाग इसके खरीदार से नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पर शपथ पत्र लेगा कि वह इस घी को न तो खाने के लिए इस्तेमाल करेगा और न ही बेचेगा।इस मामले में भीलवाड़ा के कारोबारियों से बात करने पर चौंकाने वाली जानकारी मिली है. उनका कहना है कि जिस ब्रांड के देसी घी को जब्त किया गया है उसकी कीमत महज 103 रुपये लीटर है.

साबुन बनाने वाली कंपनियां साबुन बनाने के लिए सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल करती हैं, जिसकी कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी कम होगी। ऐसे में कौन गारंटी देगा कि खरीदार इस घी का इस्तेमाल साबुन बनाने में करेगा या बाजार में बेचेगा.देसी घी की महक वाला 'सार' बाजार में आसानी से मिल जाता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह आबकारी विभाग जब्त माल को जलाकर नष्ट कर देता है, उसी तरह चिकित्सा विभाग भी जब्त नकली सामान को नष्ट कर दे.इस मामले में एक साबुन बनाने वाली कंपनी के मैनेजर विजय शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि साबुन बनाने वाली कंपनियों का यह घी महंगा होगा. जबकि विभाग के खाद्य निरीक्षक प्रेम शर्मा का कहना है कि नीलामी में घी खरीदने वाले को शपथ पत्र देना होगा कि वह इसे मानव उपयोग के लिए नहीं लेगा.