जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त, निर्दलीयों का दबदबा, कई वार्डों में दोनों पार्टियों का सूपडा साफ
जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों में जहां भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है, वहीं कई वार्डों में पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव परिणामों के अनुसार जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के कुल 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। इनमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवार शामिल हैं।
चुनाव परिणामों में एक वार्ड ऐसा भी सामने आया, जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके। इस वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला। यहां पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी रहे, जबकि बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार मुकाबले से बाहर नजर आए।
जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों में से 146 वार्डों के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए। इन नतीजों में बीजेपी ने बहुमत हासिल करते हुए एक बार फिर नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। हालांकि, कई वार्डों में पार्टी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा।
चुनाव आंकड़ों के मुताबिक, जयपुर नगर निगम के 7 वार्ड ऐसे रहे, जहां बीजेपी प्रत्याशियों को एक हजार से भी कम वोट मिले। इससे साफ है कि जहां पार्टी ने बड़ी संख्या में वार्डों में जीत दर्ज की, वहीं कुछ इलाकों में स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की लोकप्रियता का असर चुनाव परिणामों पर देखने को मिला।
इन वार्डों में बीजेपी-कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त
| पार्टी | वार्ड नंबर |
| बीजेपी | 1, 35, 71, 72, 109, 113, 119, 125, 128, 136, 137, 147, 148 |
| कांग्रेस | 1, 48, 73, 140 |
जमानत जब्त होने का मतलब है कि उम्मीदवार को कुल पड़े वैध मतों का न्यूनतम निर्धारित हिस्सा नहीं मिल पाया। ऐसे में चुनाव में बड़े राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों का इस तरह पिछड़ना स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े करता है।
जयपुर नगर निगम चुनाव में इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। कई जगहों पर स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय पहचान और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर भारी असर डाला। यही वजह रही कि कुछ वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ने में सफल रहे।
बीजेपी के लिए नगर निगम में बहुमत हासिल करना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन जिन वार्डों में पार्टी उम्मीदवारों को बेहद कम वोट मिले हैं, वहां संगठन को आत्ममंथन करना पड़ सकता है। वहीं, कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव परिणाम चुनौतीपूर्ण रहे हैं और पार्टी को कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा।
जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने यह भी संकेत दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता कई बार बड़े राजनीतिक दलों की बजाय स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं। आने वाले समय में नगर निगम बोर्ड के कामकाज और पार्षदों की भूमिका पर भी लोगों की नजर रहेगी।
