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अजमेर में दवा कारोबारी के साथ अंतरराष्ट्रीय ठगी, अफ्रीकी देशों में रजिस्ट्रेशन के नाम उड़ाये 95 लाख

अजमेर में दवा कारोबारी के साथ अंतरराष्ट्रीय ठगी, अफ्रीकी देशों में रजिस्ट्रेशन के नाम उड़ाये 95 लाख
 
अजमेर में दवा कारोबारी के साथ अंतरराष्ट्रीय ठगी, अफ्रीकी देशों में रजिस्ट्रेशन के नाम उड़ाये 95 लाख

राजस्थान के अजमेर में एक बड़ा फ्रॉड सामने आया है, जहां एक विदेशी एजेंट ने एक फार्मा कंपनी के डायरेक्टर से लाखों यूरो ठग लिए। पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिससे इंटरनेशनल जांच हो सकती है। यह घटना फार्मा बिजनेस में भरोसे की कमी दिखाती है।

विदेशी एजेंट फ्रॉड और पूरा स्कैम
सागर विहार कॉलोनी के रहने वाले दिनेश मरजानी पंचशील इलाके में मेलिसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। उनकी कंपनी साउथ अफ्रीका समेत कई देशों में फार्मास्यूटिकल्स सप्लाई करती है, जहां ऑफिशियल प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

2023 में, दिनेश ने सेनेगल की कंपनी फार्मा डिस अफ्रीका के एजेंट सोलोमन स्वांगौ से कॉन्टैक्ट किया। आरोपी ने कंपनी के 11 प्रोडक्ट्स को सात अफ्रीकी देशों: बुर्किना फासो, माली, नाइजर, कांगो, ब्राज़ाविल, आइवरी कोस्ट और सेनेगल में रजिस्टर कराने का वादा किया।

दिनेश ने सारा पेपरवर्क पूरा किया और बैंक के जरिए 105,000 यूरो या करीब 9.5 मिलियन रुपये का पेमेंट कर दिया। लेकिन, 18 महीने इंतज़ार करने के बाद भी किसी देश में रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। पैसे वापस मांगे तो आरोपी बहाने बनाने लगे। आखिर में दिनेश ने क्रिश्चियन गंज पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया।

पुलिस जांच और इंटरनेशनल कनेक्शन
पुलिस ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। जांच में बैंक ट्रांज़ैक्शन, ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट्स की जांच की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि यह किसी बड़े इंटरनेशनल नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जहां कई एजेंट मिलकर फ्रॉड करने की साज़िश करते हैं।

करेंसी एक्सचेंज रेट के हिसाब से, एक यूरो लगभग 90-91 रुपये का होता है, इसलिए यह रकम 95 से 96 लाख रुपये होती है, जिससे यह एक गंभीर आर्थिक अपराध बनता है। पुलिस अब विदेशी एजेंसियों से मदद लेने की तैयारी कर रही है।

विदेशी आरोपियों तक पहुंचने में चुनौतियां
आरोपी सोलोमन स्वांगू सेनेगल में रहता है, जिससे जांच मुश्किल हो रही है। कानूनी जानकारों का कहना है कि चूंकि वह भारत से बाहर रहता है, इसलिए सीधे नोटिस या गिरफ्तारी मुश्किल है। पुलिस को विदेश मंत्रालय के तहत म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी और इंटरपोल नोटिस के ज़रिए सेनेगल की एजेंसियों से संपर्क करना होगा। यह प्रोसेस लंबा और मुश्किल है, जिसमें बैंक डिटेल्स और डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करने के लिए विदेश से परमिशन लेनी पड़ती है। ऐसे मामलों में अक्सर देरी होती है, और पीड़ित को न्याय मिलने में समय लगता है। दिनेश जैसे बिज़नेस को भविष्य में ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए सावधान रहने की सलाह दी जा रही है।