भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे अमेरिकी टैरिफ घटने के बाद बढ़ा व्यापारिक भरोसा
लंबे समय से प्रतीक्षित भारत-अमेरिका ट्रेड डील सोमवार को आखिरकार घोषित हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। यह डील दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नया अध्याय साबित हो सकती है।
अमेरिका ने इस साल अप्रैल में भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने के कारण अगस्त में भारत पर 25% पेनल्टी का ऐलान किया गया था। इन दोनों कदमों के कारण भारत पर कुल मिलाकर 50% टैरिफ का बोझ लग गया था। अब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि नए समझौते के तहत भारत पर सिर्फ 18% टैरिफ ही लागू होगा। अमेरिका रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को हटा देगा।
इस ट्रेड डील की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इसके तुरंत बाद रात करीब 10:30 बजे ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील की जानकारी साझा की। ट्रम्प ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। भारत के लिए यह डील व्यापारिक अवसरों के नए द्वार खोल सकती है और विदेशी निवेश को भी बढ़ावा दे सकती है। साथ ही, तेल और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र सरकार ने भी इस डील को ऐतिहासिक बताया है। NDA के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह कदम न केवल भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को भी बढ़ाएगा। केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने इसे “अद्भुत और ऐतिहासिक” करार दिया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग का प्रतीक है।
हालांकि, विपक्ष इस डील को लेकर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह डील भी वैसे ही अमेरिका की ओर से घोषित की गई है जैसे ऑपरेशन सिंदूर या सीजफायर के मामलों में हुआ था। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी विदेशी नीतियों में पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं और अमेरिका द्वारा तय नियमों पर निर्भर हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस डील के बाद संसद में व्यापार और विदेश नीति पर बहस और तेज हो सकती है। विपक्ष इसे मोदी सरकार की विदेश नीति की सफलता या असफलता के पैमाने के रूप में देख रहा है। वहीं सरकार इसे आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन से जोड़कर जनता के सामने पेश कर रही है।
इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक माहौल में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यह कदम भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक लाभ भी सुनिश्चित कर सकता है।
