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भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा, फुटेज में देंखे अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका

भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा, फुटेज में देंखे अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका
 
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा, फुटेज में देंखे अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के लागू होने से पाकिस्तान के निर्यात और उद्योगों पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही देश को अरबों डॉलर के संभावित नुकसान का भी डर सता रहा है।

बताया जा रहा है कि भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए चल रही बातचीत अंतिम चरण में है। अगर यह समझौता होता है तो भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में कम या शून्य टैरिफ का फायदा मिल सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को मिलने वाली मौजूदा व्यापारिक रियायतों पर असर पड़ सकता है, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। गुरुवार को पाकिस्तान ने कहा कि वह EU अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि भारत-EU FTA का उसके निर्यात, खासकर टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा यूरोप को होने वाले निर्यात पर निर्भर है, इसलिए किसी भी तरह की टैरिफ छूट भारत को मिलने से उसके कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।

पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने भी इस मसले पर खुलकर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि EU के साथ पाकिस्तान का ‘जीरो-टैरिफ हनीमून’ अब खत्म हो चुका है। उनके मुताबिक, भारत को मिलने वाली व्यापारिक रियायतों के बाद पाकिस्तान के उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति में करीब एक करोड़ नौकरियां जोखिम में आ सकती हैं।

गोहर एजाज ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि देश के उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने सस्ती बिजली, कम टैक्स दरें और आसान कर्ज उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि स्थानीय उद्योग अन्य देशों की इंडस्ट्री से मुकाबला कर सकें। उनका कहना है कि अगर लागत कम नहीं की गई तो पाकिस्तान के निर्यातक वैश्विक बाजार में पीछे रह जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-EU FTA दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों को बदल सकता है। इससे भारत के निर्यात को बड़ा फायदा मिल सकता है, जबकि पाकिस्तान जैसे देशों पर दबाव बढ़ेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस चुनौती से निपटने के लिए क्या आर्थिक और नीतिगत कदम उठाता है। फिलहाल इस समझौते ने पाकिस्तान के नीति निर्माताओं और उद्योग जगत की चिंता बढ़ा दी है।