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मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर निर्दलीय विधायक और सांसद गुटों में तकरार, गुप्त बैठक में जताया विरोध

मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर निर्दलीय विधायक और सांसद गुटों में तकरार, गुप्त बैठक में जताया विरोध
 
मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर निर्दलीय विधायक और सांसद गुटों में तकरार, गुप्त बैठक में जताया विरोध

चित्तौड़गढ़ में निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और सांसद सीपी जोशी के गुटों के बीच सियासी खींचतान सामने आई है। विवाद का केंद्र इस बार 6 मंडल अध्यक्षों की हाल की नियुक्ति बनी है, जिसे लेकर दोनों गुटों में असंतोष और तनाव बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का आरोप है कि 6 में से 5 मंडल अध्यक्ष विधायक चंद्रभान सिंह के गुट से जुड़े हुए हैं, जबकि सांसद सीपी जोशी के समर्थक इस पर नाराज हैं। इसके चलते सांसद खेमे में जबरदस्त गुस्सा और हड़कंप मचा हुआ है।

विरोध जताने के लिए सांसद खेमे के कई कार्यकर्ता और नेता लामबंद हुए और उन्होंने गुप्त बैठक बुलाई। बैठक में प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। विशेष बात यह रही कि बैठक में किसी भी जानकारी के लीक न होने के लिए सभी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के मोबाइल फोन एक थैले में रख दिए गए।

बैठक में सियासी चर्चा के दौरान मनोनित मंडल अध्यक्षों के चयन पर विरोध जताया गया। सूत्रों का कहना है कि बैठक में नेताओं ने गुटों के बीच संतुलन और निष्पक्ष नियुक्ति की मांग भी रखी। इस बैठक से यह संकेत मिला है कि आगामी दिनों में चित्तौड़गढ़ के सियासी परिदृश्य में किसी नई हलचल या गठबंधन परिवर्तन की संभावना बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद स्थानीय स्तर की राजनीतिक नियुक्तियों और नेताओं के गुटीय दबाव का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में अक्सर सामूहिक रणनीति और गुप्त बैठकें सियासी फैसलों पर असर डालती हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बताया कि बैठक का उद्देश्य केवल विरोध जताना नहीं था, बल्कि सत्ताधारक गुटों को संतुलित करने और उचित समाधान निकालने का भी प्रयास था। उन्होंने कहा कि विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों में गुटीय राजनीति इस तरह की घटनाओं को जन्म देती है, जिससे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संबंधों में तनाव बढ़ता है।

सियासी विश्लेषकों का कहना है कि चित्तौड़गढ़ में यह घटनाक्रम निर्दलीय विधायक और सांसद गुटों के बीच ताकत और प्रभाव के संतुलन की परीक्षा भी साबित हो सकता है। आगामी दिनों में यह देखना होगा कि दोनों पक्ष राजनीतिक संवाद और रणनीति के जरिए विवाद का समाधान करते हैं या यह मामला और बढ़ता है।

निष्कर्ष: चित्तौड़गढ़ में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर पैदा हुआ विवाद स्थानीय सियासत में हलचल ला रहा है। निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह और सांसद सीपी जोशी के गुटों के बीच खींचतान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक नियुक्तियों और गुटीय दबाव के मामले इलाके की राजनीति में हमेशा अहम भूमिका निभाते हैं।