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शिक्षकों पर बढ़ता कार्यभार: पढ़ाई के साथ अन्य जिम्मेदारियों से प्रभावित हो रही शिक्षण व्यवस्था

शिक्षकों पर बढ़ता कार्यभार: पढ़ाई के साथ अन्य जिम्मेदारियों से प्रभावित हो रही शिक्षण व्यवस्था
 
शिक्षकों पर बढ़ता कार्यभार: पढ़ाई के साथ अन्य जिम्मेदारियों से प्रभावित हो रही शिक्षण व्यवस्था

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर पढ़ाई के अलावा लगातार अन्य जिम्मेदारियां भी थोपी जा रही हैं, जिनका न तो बीएड प्रशिक्षण में उल्लेख होता है और न ही अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में। इस अतिरिक्त कार्यभार के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, पहले शिक्षकों को विद्यार्थियों को मिड-डे मील के तहत दूध पिलाने से लेकर विभिन्न ऑनलाइन कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक कई कार्य सौंपे गए थे। इसके अलावा, कई बार शिक्षकों को स्कूलों में चल रही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, सर्वे और रिपोर्टिंग जैसे कार्यों में भी लगाया जाता है।

पिछले महीने शिक्षकों को स्कूल परिसरों में सफाई और अन्य व्यवस्थागत कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई थी, जिससे शिक्षण कार्य के लिए उनका समय कम हो गया। शिक्षकों का कहना है कि बार-बार मिलने वाले इन गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण वे बच्चों को पूरा समय और ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों का मुख्य कार्य केवल शिक्षण होना चाहिए। जब उन्हें अन्य कार्यों में लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके शैक्षणिक विकास पर पड़ता है। उनका कहना है कि यदि शिक्षकों को उनकी मूल जिम्मेदारी से हटाकर अन्य कार्यों में लगाया जाएगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना तय है।

शिक्षक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। कई बार उन्हें अपनी कक्षाओं के समय में कटौती कर अन्य सरकारी कार्य करने पड़ते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है।

इस मामले में प्रशासन की ओर से तर्क दिया जाता है कि सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों की भूमिका अहम होती है, लेकिन इसके बावजूद शिक्षण कार्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार को लेकर बहस जारी है। अब देखना यह होगा कि सरकार और शिक्षा विभाग इस समस्या का समाधान निकालकर शिक्षकों को उनके मूल कार्य—शिक्षण—पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर कैसे प्रदान करते हैं।