वीडियो में जाने कांग्रेस ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर मोदी सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल
अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में घोषित ट्रेड डील के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह डील पूरी तरह से अमेरिका की पहल पर हुई और भारत सरकार इसमें पूरी तरह पीछे रह गई।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “वॉशिंगटन में मोगैम्बो खुश है। ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरकार हार मान ली है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत को अपनी ही सरकार की कार्रवाइयों की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या उनके नियुक्त प्रतिनिधियों से मिलती है, और यह अब एक तरह की रूटीन बनती जा रही है।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि जैसे ऑपरेशन सिंदूर या ‘सीजफायर’ के मामले में अमेरिका ने घोषणाएँ की थीं, वैसे ही इस बार ट्रेड डील की घोषणा भी अमेरिकी पक्ष से हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह डील मोदी की रिक्वेस्ट पर की जा रही है, और क्या इसके पीछे भारत की प्राथमिकताओं की बजाय अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताएँ हैं।
कांग्रेस ने इस डील के कुछ विशेष बिंदुओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि डील के तहत बताया गया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमेरिका तथा वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति देगा। इसके अलावा, ट्रेड डील में कहा गया कि भारत अमेरिका से अधिक सामान खरीदेगा। जयराम रमेश ने पूछा, “अगर ऐसा है तो 'मेक इन इंडिया' का क्या हुआ?”। उनका कहना है कि इस तरह की डील से भारत की स्वदेशी उत्पादन नीति और आर्थिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की आलोचना इस डील को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति अब पूरी तरह अमेरिका की प्राथमिकताओं पर निर्भर होती जा रही है। पिछले कुछ समय में रूस से तेल की खरीद और अमेरिका-भारत व्यापारिक समझौतों पर इसी तरह की चर्चा हो चुकी है, और अब ट्रेड डील के बाद यह बहस और तेज हो गई है।
वहीं, NDA की तरफ से इसे ऐतिहासिक और सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह डील दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगी, भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने इसे “अद्भुत और ऐतिहासिक” बताया और कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
इस तरह, अमेरिका-भारत ट्रेड डील ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इस डील को मोदी सरकार की विदेश नीति में स्वतंत्रता की कमी और अमेरिकी दबाव को मान्यता देने के तौर पर पेश कर रही है, जबकि सरकार इसे आर्थिक और व्यापारिक सफलता के रूप में जनता के सामने पेश कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में संसद में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है, और विपक्ष ट्रेड डील और प्रधानमंत्री की विदेश नीति को लेकर लगातार सवाल उठाता रहेगा।
