वीडियो में देंखे बीकानेर रेलवे स्टेशन पर मुरलीधर व्यास की मूर्ति हटाने के विवाद में कांग्रेस और भाजपा नेता एकजुट
बीकानेर रेलवे स्टेशन पर लगी मुरलीधर व्यास की मूर्ति को हटाने के रेलवे के प्रयास को लेकर राजनीतिक नेताओं ने अनोखी एकता दिखाई है। आमतौर पर राजनीतिक विरोधी दलों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन इस मामले में भाजपा विधायक जेठानंद व्यास और कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉक्टर बी.डी. कल्ला ने रेलवे की कार्रवाई का एक स्वर में विरोध किया।
रेलवे द्वारा मूर्ति हटाने की योजना की जानकारी सामने आते ही स्थानीय नेताओं ने इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के खिलाफ बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि मुरलीधर व्यास का योगदान बीकानेर और राजस्थान की सामाजिक और साहित्यिक दुनिया में अमूल्य है। उनका कहना था कि मूर्ति को हटाना न केवल एक ऐतिहासिक प्रतीक को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि स्थानीय लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुँचाएगा।
भाजपा विधायक जेठानंद व्यास ने बताया, “हमारे लिए यह मूर्ति केवल एक शिल्पकला का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह बीकानेर की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है। इसे हटाना पूरी तरह अनुचित है।” वहीं, कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉक्टर बी.डी. कल्ला ने कहा, “राजनीति अलग हो सकती है, लेकिन इस मामले में सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रेलवे प्रशासन को इसे ध्यान में रखते हुए कदम उठाना चाहिए।”
नेताओं के विरोध और स्थानीय जनसंपर्क के बाद रेलवे ने फिलहाल मूर्ति हटाने का काम रोक दिया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वह सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे। रेलवे के सूत्रों ने बताया कि “हम इसे लेकर सभी कानूनी और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। फिलहाल मूर्ति को हटाने का कार्य स्थगित कर दिया गया है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक मूर्ति के हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक सम्मान, स्थानीय भावनाओं और प्रशासनिक निर्णयों के बीच संतुलन बनाने का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेताओं की एकता ने स्पष्ट कर दिया है कि सांस्कृतिक विरासत के मामलों में राजनीति से ऊपर उठकर समाज की भावनाओं को महत्व दिया जाना चाहिए।
स्थानीय लोग भी नेताओं के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुरलीधर व्यास की मूर्ति उनके लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुसार, मूर्ति हटाने से युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को इस महान साहित्यकार और समाजसेवी के योगदान की जानकारी नहीं मिल पाएगी।
बीकानेर रेलवे स्टेशन पर मुरलीधर व्यास की मूर्ति विवाद ने यह दिखाया है कि किसी भी सांस्कृतिक प्रतीक को हटाने का निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। नेताओं और जनता की एकजुट प्रतिक्रिया से यह संदेश गया है कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
इस तरह, रेलवे के मूर्ति हटाने के निर्णय को फिलहाल स्थगित करने के बाद स्थानीय समाज और राजनीतिक दलों में एक सकारात्मक संवाद शुरू हुआ है। अब यह देखने वाली बात होगी कि रेलवे प्रशासन समाज और राजनीति के इस संयुक्त संदेश पर क्या कदम उठाता है।
