राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी, वीडियो में जाने जोधपुर में 24 घंटे में दो महिलाओं ने तोड़ा दम; स्वास्थ्य विभाग सतर्क
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा, बीकानेर और बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में भी 24 घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों महिलाओं की डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ गई थी और उनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा था। चिकित्सकों के अनुसार, दोनों मामलों में प्रसव के बाद गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं सामने आईं। मेडिकल टीम पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही है और मौत के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद बिगड़ी समू की हालत
जानकारी के अनुसार, प्रसूता समू की 24 जून को तिंवरी अस्पताल में सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) हुआ था। डिलीवरी के बाद लगातार रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने पर उसे तत्काल उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।करीब चार दिन तक उम्मेद अस्पताल में इलाज के बाद 27 जून को उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए महात्मा गांधी अस्पताल भेजा गया। वहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और लगातार डायलिसिस भी किया जा रहा था।अस्पताल सूत्रों के अनुसार, 14 जुलाई से उसकी तबीयत दोबारा तेजी से बिगड़ने लगी और रविवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दूसरी प्रसूता की भी इलाज के दौरान मौत
दूसरी प्रसूता डिंपल को 30 जून को मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दिन उसकी डिलीवरी हुई थी। प्रसव के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब होती गई, जिसके चलते उसका लंबे समय तक उपचार चला।मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि डिंपल का इलाज 17 जुलाई तक चला था। इसके बाद 19 जुलाई की रात करीब 9 बजे उसकी तबीयत अचानक फिर बिगड़ गई और उसे दोबारा अस्पताल लाया गया। तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।20 जुलाई को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की समीक्षा
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं। अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की निगरानी और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के बाद यदि अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, किडनी संबंधी समस्या या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
मौत के कारणों की होगी विस्तृत जांच
अस्पताल प्रशासन ने दोनों मामलों की चिकित्सकीय समीक्षा शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। यदि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।लगातार बढ़ रहे ऐसे मामलों ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद हाई-रिस्क मरीजों की समय पर पहचान और बेहतर निगरानी से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
