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राजस्थान विधानसभा में विधायक ने उठाया प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का मुद्दा, संस्कृति पर पड़ते असर की चिंता

राजस्थान विधानसभा में विधायक ने उठाया प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का मुद्दा, संस्कृति पर पड़ते असर की चिंता
 
राजस्थान विधानसभा में विधायक ने उठाया प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का मुद्दा, संस्कृति पर पड़ते असर की चिंता

राजस्थान विधानसभा के शून्य काल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक विधायक ने एक अहम और विवादित मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में युवाओं द्वारा घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के मामलों पर चिंता जताई और इसे भारतीय संस्कृति के लिए खतरा बताया।

विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवा पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक नैतिकता को नजरअंदाज कर अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना था कि प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का बढ़ता चलन परिवार और समाज की नींव को कमजोर कर सकता है। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस विषय पर सामाजिक जागरूकता अभियान और पारिवारिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए, ताकि युवा अपनी जिम्मेदारियों और सांस्कृतिक मूल्यों को समझें।

सदन में इस मुद्दे को उठाने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सदस्यों के बीच हल्की बहस भी हुई। कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि व्यक्तिगत संबंधों और विवाह के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए और युवा अपनी समझ और सहमति के आधार पर निर्णय लेने में स्वतंत्र हैं। वहीं, कुछ सदस्य विधायकों के विचारों का समर्थन करते हुए परिवार और सामाजिक संरचना के महत्व पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच और पारिवारिक संरचना की दिशा का भी संकेत देता है। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखना आज के युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय अब सामाजिक बहस का हिस्सा बन गए हैं, क्योंकि वे परिवार और संस्कृति पर गहन प्रभाव डालते हैं।

राजस्थान में हाल के वर्षों में युवाओं के बीच सामाजिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इसी कारण कुछ परिवार पारंपरिक विवाह व्यवस्था की अपेक्षा प्रेम विवाह और सहमति आधारित संबंधों को स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, इस बढ़ते ट्रेंड को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता और विवाद भी देखा जा रहा है।

विधायक ने सदन में यह भी सुझाव दिया कि शिक्षा और मीडिया के माध्यम से युवा वर्ग में पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा दिया जाए। उनका मानना है कि केवल कानूनी उपाय पर्याप्त नहीं हैं; सामाजिक जागरूकता और नैतिक शिक्षा भी आवश्यक है।

इस मुद्दे ने राजस्थान विधानसभा में एक बार फिर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर बहस को जीवंत कर दिया। यह स्पष्ट है कि प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय भविष्य में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बने रहेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि युवाओं को स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना सिखाया जा सके।