Aapka Rajasthan

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास पर गरमाई बहस, विपक्ष ने घेरा सरकार को

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास पर गरमाई बहस, विपक्ष ने घेरा सरकार को
 
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास पर गरमाई बहस, विपक्ष ने घेरा सरकार को

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जबरदस्त बहस देखने को मिली। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जिसमें विपक्ष ने कई मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा। परिसीमन, 'वन स्टेट वन इलेक्शन' और मनरेगा के प्रावधानों जैसे अहम विषयों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने जोरदार पलटवार किया।

गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच तीखी बहस

परिसीमन के मुद्दे पर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सवाल उठाए कि सरकार ने इस मुद्दे को किस तरह से हल किया है और इसके परिणाम राज्य के लिए क्या होंगे। इसके बाद, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विपक्षी नेताओं के आरोपों का पलटवार करते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और विधिक तरीके से की गई है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यह मुद्दा केवल जनता को गुमराह करने के लिए उठाया गया है।

इसके बाद, जब 'वन स्टेट वन इलेक्शन' पर चर्चा हुई, तो भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह कदम केवल चुनावों को प्रभावित करने के लिए उठाया जा रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे देश के लोकतंत्र को मजबूती देने की दिशा में एक कदम बताया।

मनरेगा और ग्रामीण विकास की योजनाओं पर आरोप-प्रत्यारोप

विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली मजदूरी का सही तरीके से भुगतान नहीं हो रहा है और सरकार इस योजना का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचा पा रही है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और पूछा कि आखिरकार इस योजना का लाभ आम जनता को कब मिलेगा।

इस पर मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, मदन दिलावर और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत कार्यों की समीक्षा लगातार की जा रही है और राज्य सरकार ने हर क्षेत्र में विकास के लिए ठोस कदम उठाए हैं। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।

विवाद में दूध, राष्ट्रभक्ति और मिड-डे मील तक की बात

सदन में बहस और भी दिलचस्प मोड़ पर पहुंची जब विवाद दूध, राष्ट्रभक्ति और मिड-डे मील तक पहुंच गया। विपक्ष ने मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को मिलने वाली गुणवत्ता पर सवाल उठाए, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे एक ऐतिहासिक योजना बताया, जिससे लाखों बच्चों को पोषण मिल रहा है।

इसके साथ ही, दूध के वितरण और उसके मानकों पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने दूध के वितरण में गड़बड़ी की है और इसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।