मलेशिया में नौकरी के नाम पर युवक को 2 लाख में बेचा, वीडियो में जाने 71 दिन तक बंधक बनाकर कराया काम; पत्नी की शिकायत पर हुई घर वापसी
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 2 लाख रुपये में बेच दिया गया। युवक को पहले दिल्ली, फिर थाईलैंड और उसके बाद अवैध रास्ते से मलेशिया भेजा गया। मलेशिया पहुंचने के बाद उसे 71 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन काम कराया गया।
पीड़ित युवक की पहचान शहाब के रूप में हुई है। शहाब के मुताबिक, उसे बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई का झांसा देकर एजेंटों ने अपने जाल में फंसाया। इसके बाद उसे भारत से बाहर भेज दिया गया। उसने बताया कि उसे 15 अप्रैल को दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट से थाईलैंड भेजा गया था। उसे उम्मीद थी कि आगे का सफर सामान्य होगा, लेकिन थाईलैंड पहुंचते ही हालात बदल गए।
शहाब ने बताया कि थाईलैंड पहुंचने के बाद एजेंटों के कुछ लोगों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे जंगलों के रास्ते अवैध तरीके से मलेशिया पहुंचाया गया। मलेशिया पहुंचते ही उसका पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिया गया। इसके बाद उसे सुबंग जाया इलाके की एक सुनसान जगह पर रखा गया।
पीड़ित का आरोप है कि वहां उससे बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी। काम करने से मना करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। उसने बताया कि कई दिनों तक उसे खाना और पानी तक नहीं दिया गया। शहाब के अनुसार, वह काफी मुश्किल हालात में था और उसे मलेशिया में किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही थी।
बंधक रहने के दौरान शहाब ने किसी तरह मौका निकालकर भारत में अपनी पत्नी नौशीन रिजवी से संपर्क किया और पूरी घटना बताई। पत्नी ने तुरंत मामले की जानकारी लेकर बुलंदशहर के एसएसपी कार्यालय पहुंचकर मदद की गुहार लगाई।
इसके बाद परिवार ने युवक को वापस लाने के लिए प्रयास शुरू किए। परिजनों ने भारत से करीब 50 हजार रुपये का इंतजाम कर मलेशिया भेजे, जिसके बाद शहाब की वापसी के लिए टिकट की व्यवस्था हो सकी। आखिरकार, 26 जून को वह सुरक्षित भारत लौट आया।
शहाब ने बताया कि उसने एजेंटों के चंगुल से किसी तरह खुद को छुड़ाया और छिपकर फोन के जरिए पत्नी से संपर्क किया। उसने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि विदेश जाने से पहले उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह इतनी बड़ी मुसीबत में फंस जाएगा।
इस घटना ने विदेशों में नौकरी के नाम पर होने वाली मानव तस्करी और फर्जी एजेंटों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले लोगों को हमेशा सरकारी स्तर पर पंजीकृत एजेंटों और वैध प्रक्रियाओं के जरिए ही जाना चाहिए।
फिलहाल पीड़ित परिवार आरोपी एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से लोगों को ऐसे फर्जी नौकरी के झांसे से सावधान रहने की अपील की जा रही है।
