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राजस्थान दिवस पर ‘समुद्र मंथन’ का प्रभावशाली मंचन, वीडियो में देखें कला और साहित्य का संदेश

राजस्थान दिवस पर ‘समुद्र मंथन’ का प्रभावशाली मंचन, वीडियो में देखें कला और साहित्य का संदेश
 
राजस्थान दिवस पर ‘समुद्र मंथन’ का प्रभावशाली मंचन, वीडियो में देखें कला और साहित्य का संदेश

राजस्थान दिवस के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में जयपुर के जवाहर कला केंद्र में नाटक ‘समुद्र मंथन’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। इस भव्य नाट्य प्रस्तुति का आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा किया गया, जिसमें प्रदेश की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के रंगमंडल द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया। नाटक में 100 से अधिक कलाकारों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर कलाकारों की भूमिका, संवाद और अभिव्यक्ति ने नाटक को न केवल मनोरंजक बनाया, बल्कि दर्शकों के मन में कला और साहित्य के महत्व पर गहरा प्रभाव डाला।

नाटककार आसिफ अली ने इस नाटक में पौराणिक कथा को समकालीन संदर्भों के साथ जोड़ते हुए इसे एक नई दृष्टि प्रदान की। नाटक की शुरुआत ही एक गहरे प्रश्न से होती है – “हम कला और साहित्य पर मंथन क्यों करें?”। इस प्रश्न के माध्यम से नाटक ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया कि कला और साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन और समाज के मूल्यों को समझने का माध्यम भी हैं।

नाटक के दौरान कलाकारों ने संवाद, नृत्य, संगीत और मंच सज्जा का ऐसा संयोजन प्रस्तुत किया कि हर दृश्य दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ गया। नाटक का प्रत्येक दृश्य दर्शकों को कथा और संदेश के बीच के सांस्कृतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से जोड़ता रहा। मंचन में उपयोग किए गए रोशनी, ध्वनि प्रभाव और पृष्ठभूमि संगीत ने कहानी की गहराई को और बढ़ा दिया।

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने नाटक के बाद कहा कि यह प्रस्तुति न केवल सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उन्होंने कलाकारों और आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और कला प्रेम को बढ़ावा मिलता है।

‘समुद्र मंथन’ नाटक दर्शकों को कला, संस्कृति और जीवन के मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाने में सफल रहा। नाटककार और निर्देशक ने मिलकर एक ऐसा मंच तैयार किया, जिसने पौराणिक कथा को आधुनिक समय की सोच और समाज के संदर्भों से जोड़कर पेश किया। नाटक का संदेश स्पष्ट है कि कला और साहित्य पर विचार और मंथन करना हर समाज के लिए आवश्यक है, और यही संदेश पूरे नाटक के अंत में दर्शकों के सामने उभरकर आता है।

राजस्थान दिवस के इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को कला और साहित्य के महत्व से रूबरू कराया और यह साबित किया कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत और प्रभावशाली है।