हाईकोर्ट का अहम फैसला: दिव्यांग मेरिट टॉपर छात्रा को मिलेगा MBBS में प्रवेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नीट यूजी-2025 के दिव्यांग कोटे में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश देने का आदेश दिया है। यह निर्णय राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभ्रा मेहता शामिल थे।
मामला वैष्णवी अग्रवाल से जुड़ा है, जिन्होंने नीट यूजी-2025 परीक्षा में दिव्यांग कोटे के तहत आवेदन किया था। बताया गया कि उनके दाएं हाथ की दो अंगुलियों में स्थायी दिव्यांगता है। इसके बावजूद उन्होंने मेहनत और समर्पण के साथ परीक्षा दी और दिव्यांग श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
हालांकि, जब उन्होंने एम्स दिल्ली में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए आवेदन किया, तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया और एडमिशन देने से इनकार कर दिया गया। इस निर्णय को छात्रा ने चुनौती दी और हाईकोर्ट में अपील दायर की।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि छात्रा ने दिव्यांगता के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और नियमों के तहत उसे अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने एम्स दिल्ली के निर्णय को अनुचित मानते हुए छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे एमबीबीएस में प्रवेश देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले को दिव्यांगजनों के अधिकारों और समान अवसरों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।
फैसले के बाद वैष्णवी अग्रवाल के परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं, शिक्षा जगत में इस निर्णय को लेकर सकारात्मक चर्चा हो रही है। अदालत का यह आदेश न केवल इस छात्रा के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि योग्य उम्मीदवारों को उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए।
