खेजड़ी बचाओ आंदोलन का असर: बीकानेर बंद सफल, बाजार बंद रहे, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को दी चेतावनी
खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में चल रहे ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ का असर सोमवार को बीकानेर शहर में व्यापक रूप से देखने को मिला। आंदोलन के समर्थन में शहर के प्रमुख बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर 2 बजे तक बंद रहे। व्यापारिक संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए बंद को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, शहरी क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई, जिससे जनजीवन पर भी आंदोलन का स्पष्ट प्रभाव नजर आया।
सुबह से ही शहर में बंद का माहौल देखने को मिला। मुख्य बाजार, दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम चहल-पहल दिखाई दी। व्यापारियों का कहना है कि खेजड़ी के पेड़ केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और परंपरा का भी अहम हिस्सा हैं। ऐसे में इनकी कटाई किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
आंदोलन के तहत शहर में महापड़ाव और धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों, किसानों और आम नागरिकों ने भाग लिया। लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए खेजड़ी संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी महापड़ाव में पहुंचे। उन्होंने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। भाटी ने कहा कि खेजड़ी राजस्थान की पहचान है और इसे खत्म करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पेड़ों की कटाई तुरंत नहीं रोकी गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर भी इसकी झलक दिखनी चाहिए। सरकार एक ओर पौधरोपण अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड़ों को काटा जा रहा है, जो दोहरी नीति को दर्शाता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी का पेड़ मरुस्थलीय क्षेत्रों में जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। यह न केवल पशुओं के चारे का प्रमुख स्रोत है, बल्कि मिट्टी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में भी अहम योगदान देता है। ऐसे में इसकी अंधाधुंध कटाई भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
फिलहाल, बीकानेर बंद शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन लोगों में रोष साफ दिखाई दिया। अब सबकी नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है।
