चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का असर, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; मौसम विभाग ने दी चेतावनी
नवंबर की शुरुआत में देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के प्रभाव से कई राज्यों में भारी से मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज कई राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की आशंका है।
मौसम में इस बदलाव का असर खासतौर पर बंगाल की खाड़ी के आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। चक्रवाती तूफान के प्रभाव से समुद्र के आसपास के इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
चक्रवाती तूफान के असर से बदलेगा मौसम
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के कारण वातावरण में नमी बढ़ने और बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इसके प्रभाव से कई राज्यों में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित होने और सामान्य जनजीवन में परेशानी आने की आशंका भी रहती है।
तेज हवाओं और गरज-चमक की भी चेतावनी
मौसम विभाग ने बारिश के साथ आंधी और गरज-चमक की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान बिजली गिरने का खतरा भी रहता है। ऐसे में लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए।
समुद्र के आसपास रहने वाले मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
किसानों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह
भारी बारिश का असर खेती और यातायात पर भी पड़ सकता है। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। वहीं, सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है। यात्रियों को यात्रा से पहले मौसम और संबंधित सेवाओं की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जाती है।
फिलहाल चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के प्रभाव से कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि, किन राज्यों और जिलों में सबसे ज्यादा बारिश होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और प्रशासन की एडवाइजरी पर नजर रखनी चाहिए।
