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हिंडोली में अवैध खुदाई से फूल सागर तालाब पर संकट, ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन

हिंडोली में अवैध खुदाई से फूल सागर तालाब पर संकट, ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन
 
हिंडोली में अवैध खुदाई से फूल सागर तालाब पर संकट, ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन

जिले की हिंडोली तहसील में अवैध रूप से पेटा कास्त भूमि की खुदाई कर डंपरों के माध्यम से फूल सागर तालाब को भरने और प्राकृतिक जल स्रोत को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। इसको लेकर बोरखंडी और रामपुरिया गांव के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा पेटा कास्त भूमि से बड़े पैमाने पर अवैध खुदाई की जा रही है। खुदाई से निकली मिट्टी और मलबे को डंपरों में भरकर फूल सागर तालाब में डाला जा रहा है, जिससे तालाब का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब वर्षों से आसपास के गांवों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत रहा है और इससे सिंचाई के साथ-साथ पशुओं की प्यास भी बुझती है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि यदि तालाब को इस तरह भरा गया तो आने वाले समय में जल संकट गहरा सकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों को नष्ट करना पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए घातक साबित होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अवैध खुदाई और तालाब में मिट्टी डालने का काम तुरंत नहीं रोका गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

ग्रामीणों ने सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, तालाब में डाली गई मिट्टी को हटाकर उसे पुनः अपने मूल स्वरूप में लाया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही क्षेत्र में नियमित निगरानी की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फूल सागर तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि गांव की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण के लिए प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांगों पर कब तक अमल होता है और प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।