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IIT कानपुर की रिसर्च: कानपुर और प्रयागराज भूकंप के प्रति संवेदनशील, गंगा के मैदानी इलाके खतरे में

IIT कानपुर की रिसर्च: कानपुर और प्रयागराज भूकंप के प्रति संवेदनशील, गंगा के मैदानी इलाके खतरे में
 
IIT कानपुर की रिसर्च: कानपुर और प्रयागराज भूकंप के प्रति संवेदनशील, गंगा के मैदानी इलाके खतरे में

साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने उत्तर प्रदेश समेत पूरे क्षेत्र को हिला दिया था। उस समय के झटके इतने प्रबल थे कि लोग कई मिनट तक सहमते रहे। भूकंप तो कई क्षेत्रों में तबाही मचाकर चला गया, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, सिस्टम और आम लोगों ने पर्याप्त तैयारी नहीं की।

हाल ही में IIT कानपुर ने एक लंबी और व्यापक रिसर्च के बाद चेतावनी दी है कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों, खासकर कानपुर और प्रयागराज, में 6.5 तीव्रता से ऊपर का भूकंप बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है।

IIT कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा ने बताया कि इन दोनों शहरों की मिट्टी में समस्या सबसे बड़ी चुनौती है। जमीन के नीचे मिट्टी में बालू के कण बेहद महीन हैं। भूकंप के तेज झटकों के दौरान यह महीन मिट्टी तरल रूप धारण कर सकती है। यह प्रक्रिया ‘लिक्विफ़िकेशन’ के नाम से जानी जाती है, जिसमें मिट्टी अपनी ताकत खो देती है और जमीन में मौजूद पानी ऊपर आ जाता है।

प्रोफेसर पात्रा के अनुसार, जब मिट्टी की ताकत खत्म होती है और पानी बाहर निकलता है, तो पक्के ढांचे और इमारतें गिरने लगती हैं। इसका मतलब यह है कि भूकंप का असर सिर्फ झटकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थापत्य संरचनाओं की स्थायित्व क्षमता भी प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में भूकंप अचानक और तीव्र रूप से तबाही मचा सकता है, यदि पूर्व तैयारी और मजबूत भवन निर्माण को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि भवन निर्माण नियमों में सुधार, मिट्टी और नींव की जांच, और आपदा प्रबंधन योजनाओं को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में जमीन का प्रकार और पानी की मात्रा भूकंप की गंभीरता को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी और नगर निकायों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में किसी आपदा के समय नुकसान कम से कम हो।

भूकंप विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भूकंप सुरक्षा के निर्देशों का पालन, आपातकालीन किट तैयार करना, और स्थानीय भवनों की मजबूती जांचना जरूरी है।

इस प्रकार, IIT कानपुर की रिसर्च से स्पष्ट हुआ है कि कानपुर और प्रयागराज गंगा मैदानी क्षेत्रों में भूकंप के प्रति संवेदनशील हैं, और यदि उचित तैयारी नहीं की गई तो भारी तबाही और जनहानि संभव है। यह चेतावनी प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए सक्रिय कदम उठाने का संकेत है।