चाहते तो डोटासरा की नाक नीचे करवा देते...BJP राजस्थान चीफ मदन राठौड़ जमकर बरसे
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से कांग्रेस की जीत के दावे पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार किया है। राठौड़ ने गहलोत के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि वह अपनी झेंप मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत को अभी आत्मविश्वास दिखाना जरूरी है, वरना राजनीतिक स्थिति उनके लिए मुश्किल हो सकती है।
मदन राठौड़ ने पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस और अशोक गहलोत के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गहलोत लगातार कांग्रेस के पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। राठौड़ के मुताबिक, यह बयान राजनीतिक तौर पर अपनी स्थिति मजबूत दिखाने की कोशिश का हिस्सा है।
दरअसल, अशोक गहलोत ने हाल ही में राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस की जीत का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और गांवों में पार्टी के पक्ष में माहौल है। गहलोत ने ग्रामीण मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा।
गहलोत ने पंचायत चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत का दावा करते हुए कहा था कि गांव की जनता बीजेपी को जवाब देगी। उन्होंने निकाय चुनाव के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब पंचायत स्तर पर भी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।
इसी बयान को लेकर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गहलोत अपनी झेंप मिटाने के लिए कॉन्फिडेंस दिखा रहे हैं। राठौड़ ने यहां तक कहा कि अगर गहलोत आज आत्मविश्वास नहीं दिखाएंगे तो उनकी ‘दुकान’ कल ही खाली हो जाएगी। यह टिप्पणी उन्होंने राजनीतिक संदर्भ में गहलोत के नेतृत्व और कांग्रेस की स्थिति पर तंज के तौर पर की।
राठौड़ ने कांग्रेस के अंदर नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता अलग-अलग मुद्दों पर अपनी-अपनी बात कर रहे हैं और पार्टी में एकजुटता की कमी दिखाई देती है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग नेताओं की अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। चुनाव चार चरणों में होने हैं और नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होगी। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
पंचायत चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ किसानों, विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण सुविधाओं को लेकर भी राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेर रहे हैं। आने वाले दिनों में नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल गहलोत के जीत के दावे और राठौड़ के पलटवार ने राजस्थान की पंचायत चुनावी राजनीति में सियासी माहौल को गरमा दिया है।
