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40 विला-कॉटेज खरीदने के विवाद में IAS शिखर अग्रवाल APO, राजस्थान सरकार ने देर रात लिया फैसला

 
40 विला-कॉटेज खरीदने के विवाद में IAS शिखर अग्रवाल APO, राजस्थान सरकार ने देर रात लिया फैसला

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को 40 विला और कॉटेज खरीदने से जुड़े विवाद के बीच देर रात एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। कार्मिक विभाग की ओर से 28 अक्टूबर की रात जारी आदेश के अनुसार, अग्रवाल को आगामी आदेशों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। वह उद्योग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

ढाई साल में 40 विला-कॉटेज खरीदने का मामला

यह विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद चर्चा में आया। रिपोर्ट के मुताबिक, शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों ने करीब ढाई साल के दौरान एक ही कंपनी, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से 40 विला और कॉटेज खरीदे।

बताया गया है कि इनमें अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा इलाके में 20 कॉटेज शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संपत्तियां परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई थीं।

खरीद के बाद उसी कंपनी को लीज पर दी संपत्तियां

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को लीज पर देने को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, अजबगढ़ के विला और बुझड़ा के कॉटेज गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को ही लीज पर दिए गए। दावा है कि इससे सालाना करीब 1.80 करोड़ रुपये की आय निर्धारित हुई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 27 मार्च 2026 को अजबगढ़ के 20 विला की रजिस्ट्री हुई। इसी तारीख को कंपनी के होटल-रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत विशेष निवेश पैकेज से संबंधित आदेश जारी किया गया था। इन तथ्यों के सामने आने के बाद संपत्ति सौदों और सरकारी निर्णयों के बीच संभावित हितों के टकराव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी अनियमितता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही हो सकती है।

कई अहम पदों पर थे तैनात

शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। एपीओ किए जाने से पहले वे उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), सरकारी उपक्रम, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) सहित अन्य संस्थाओं में भी प्रमुख पदों पर थे।

जांच और जवाब पर टिकी नजरें

इस मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि संबंधित अधिकारी दंपती तथ्यों पर अपना पक्ष रखने में सक्षम हैं।

शिखर अग्रवाल की ओर से पहले संपत्तियों का विवरण अचल संपत्ति विवरण (IPR) और रिटर्न में दिए जाने की बात कही गई थी। अब एपीओ की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की प्रशासनिक समीक्षा और संबंधित पक्षों के विस्तृत जवाब पर नजर रहेगी। फिलहाल, एपीओ किया जाना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता। संपत्ति खरीद, लीज समझौते और सरकारी प्रोत्साहन पैकेज से जुड़े सवालों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही निकाला जा सकेगा।