भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में जल संकट: सैकड़ों मछलियों की मौत, सूखे तालाबों से पलायन कर रहे पक्षी
राजस्थान के प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में जल संकट ने वन्यजीवों और पक्षियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। पार्क के कई जलाशय सूखने के कारण सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है, वहीं पानी के अभाव में कछुए भी परेशान हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में पक्षियों ने सूखे तालाबों को छोड़कर दूसरे वेटलैंड क्षेत्रों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। विश्व प्रसिद्ध इस पक्षी विहार में पानी की कमी से जैव विविधता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने पार्क में जल प्रबंधन को लेकर चिंता जताई है।
सूखे तालाबों ने बढ़ाई परेशानी
केवलादेव नेशनल पार्क के कई हिस्सों में जलस्तर लगातार गिर रहा है। तालाबों और छोटे जल स्रोतों के सूखने से जलीय जीवों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।पानी की कमी के कारण मछलियां बड़ी संख्या में मर गईं। वहीं, पानी में रहने वाले कछुओं को भी जीवन बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
पक्षियों ने बदला ठिकाना
केवलादेव नेशनल पार्क देश-विदेश के पक्षियों के लिए प्रमुख आश्रय स्थल माना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं।लेकिन इस बार जल संकट के चलते कई पक्षी सूखे क्षेत्रों को छोड़कर दूसरे वेटलैंड इलाकों की ओर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो इसका असर पक्षियों की संख्या और उनके प्रवास पर पड़ सकता है।
जल प्रबंधन पर उठे सवाल
पर्यावरणविदों का कहना है कि केवलादेव जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है। पार्क का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र पानी पर निर्भर है।उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जल स्रोतों को भरने और वन्यजीवों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
केवलादेव नेशनल पार्क राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां जल संकट वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।अब देखना होगा कि प्रशासन पार्क में पानी की समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है, ताकि मछलियों, कछुओं और हजारों पक्षियों का यह प्राकृतिक घर सुरक्षित रह सके।
