जयसमंद झील में मछली उत्पादन में भारी गिरावट, 2500 परिवारों की आजीविका पर संकट
Jaisamand Lake से एक गंभीर आर्थिक और पर्यावरणीय संकट की खबर सामने आई है, जहां मत्स्य उत्पादन में तेज गिरावट के कारण करीब 2500 मछुआरा परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है।
उत्पादन 45 क्विंटल से घटकर 80 किलो तक
जानकारी के अनुसार झील में पहले जहां रोजाना लगभग 45 क्विंटल मछली का उत्पादन होता था, वहीं अब यह घटकर मात्र 80 किलो तक पहुंच गया है। इस गिरावट ने स्थानीय मत्स्य उद्योग को लगभग ठप कर दिया है।
Jaisamand Lake क्षेत्र के मछुआरों का कहना है कि लगातार घटते उत्पादन ने उनकी आय को बुरी तरह प्रभावित किया है और परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर
स्थानीय मछुआरों के अनुसार झील में कई पारंपरिक मछली प्रजातियां या तो खत्म हो चुकी हैं या विलुप्त होने के कगार पर हैं। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा है।
मछुआरों की मांग
मछुआरा समुदाय ने मांग की है कि झील के बेहतर प्रबंधन के लिए एक प्रभावी प्रणाली लागू की जाए। उन्होंने ‘राजसंघ मॉडल’ जैसी व्यवस्था अपनाने की अपील की है, जिससे मत्स्य संसाधनों का संरक्षण और उत्पादन दोनों बढ़ सके।
संभावित कारणों पर चर्चा
विशेषज्ञों के अनुसार जल प्रदूषण, अनियंत्रित मत्स्य शिकार, जल स्तर में गिरावट और प्रबंधन की कमी इस स्थिति के प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि, विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
प्रशासन के लिए चुनौती
Jaisamand Lake में उत्पन्न यह स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि इससे हजारों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
