'जल महलों की नगरी' डीग में हुआ रंगों से सजी होली महोत्सव का आयोजन
अपनी गौरवशाली संस्कृति और रंगीले मिजाज के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसी संस्कृति के अद्भुत रूप को प्रदर्शित करते हुए, 'जल महलों की नगरी' के नाम से मशहूर डीग में पर्यटन विभाग द्वारा होली महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ और पारंपरिक रंगों का जश्न मनाने का मौका मिला, जिससे न केवल डीग बल्कि पूरे राजस्थान का परंपरागत रंग उभर कर सामने आया।
रियासतकालीन फव्वारों की हलचल में होली का जश्न
डीग के ऐतिहासिक महल परिसर में जब रियासतकालीन 2000 फव्वारे एक साथ सक्रिय हुए, तो वह दृश्य बेहद रोमांचक और मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। जैसे ही फव्वारों से पानी की बौछारें उड़ने लगीं, पूरी महल परिसर में होली के रंग फैल गए। रंगीन पानी की बौछारों और उड़ी हुई गुलाल की हवाओं ने महल के वातावरण को महकाया और यहां के हर कोने में होली का उल्लास समा गया।
यह दृश्य न केवल देखने लायक था, बल्कि इसमें राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक वैभव का शानदार संगम भी था। रियासतकालीन जल महलों और फव्वारों के साथ रंगों का मेल एक अद्भुत छटा प्रस्तुत कर रहा था, जिसने उपस्थित दर्शकों को पूरी तरह से मोहित कर लिया।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से सजी महोत्सव की शाम
होली महोत्सव के दौरान, देशभर से आए लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी खास बना दिया। इन कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला और संगीत से होली के रंगों में एक नया रंग भरा। लोक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों की धुनें इतनी आकर्षक थीं कि ऐसा महसूस हो रहा था जैसे इंद्रधनुष खुद जमीन पर आ गया हो। कलाकारों की यह प्रस्तुतियाँ महल के आंगन में गूंज उठी और सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इतिहास और संस्कृति से जुड़ी इन प्रस्तुतियों ने महोत्सव को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आभा दी। विशेष रूप से, राजस्थान की लोक कला और पारंपरिक संगीत ने इस आयोजन को एक और स्तरीय उत्सव में बदल दिया, जो न केवल राज्यवासियों बल्कि देश भर के पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बन गया।
