अलवर में 3 महीने की मासूम के साथ यौन दुर्व्यवहार पर ऐतिहासिक फैसला, दोषी को उम्रकैद
राजस्थान के अलवर जिले से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिले की विशेष अदालत (पोक्सो कोर्ट संख्या-1) ने शुक्रवार को 3 महीने की एक मासूम बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत का यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से अहम माना जा रहा है, बल्कि समाज के लिए भी एक सख्त संदेश है।
यह मामला अपने आप में बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला था। तीन महीने की नन्ही बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश किया।
विशेष लोक अभियोजक ने कोर्ट में मामले की पैरवी करते हुए कहा कि यह अपराध मानवता को शर्मसार करने वाला है। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल जांच, गवाहों के बयान और अन्य ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध किए। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और तर्कों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।
पोक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज की आत्मा को झकझोरते हैं और ऐसे मामलों में कठोरतम सजा देना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का जघन्य अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मासूम बच्चों के खिलाफ अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
कोर्ट ने दोषी को आजीवन कारावास के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया है। साथ ही पीड़ित बच्ची के इलाज और पुनर्वास के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना ही इस फैसले का मुख्य उद्देश्य है।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। परिजनों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और अदालत के फैसले ने उस भरोसे को मजबूत किया है। वहीं समाज के विभिन्न वर्गों और महिला-बाल अधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
यह फैसला पोक्सो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण है। इससे यह संदेश जाता है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है।
अलवर पुलिस और अभियोजन टीम की भी इस मामले में सराहना की जा रही है, जिन्होंने त्वरित और निष्पक्ष जांच कर मामले को अदालत तक मजबूती से पहुंचाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी है कि मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून की सबसे कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा।
