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जेडीए में शामिल 679 गांवों में निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, फुटेज में देंखे सरकार से जवाब तलब

जेडीए में शामिल 679 गांवों में निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, फुटेज में देंखे सरकार से जवाब तलब
 
जेडीए में शामिल 679 गांवों में निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, फुटेज में देंखे सरकार से जवाब तलब

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में शामिल किए गए 679 गांवों में किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश कार्यवाहक न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस बलजिंदर संधू की खंडपीठ ने संजय जोशी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन गांवों को जेडीए में शामिल करने के बाद वहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण की आशंका बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह रोक लगाई है, ताकि मामले की सुनवाई के दौरान स्थिति यथास्थिति बनी रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

कोर्ट ने राज्य सरकार और जेडीए से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा है। विशेष रूप से, अदालत ने यह सवाल उठाया है कि आखिर किन आधारों पर इन गांवों को जेडीए के दायरे में शामिल किया गया। इसके साथ ही, कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2025 को जारी की गई उस अधिसूचना पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत जेडीए का भौगोलिक विस्तार किया गया था।

इस अधिसूचना के बाद जयपुर शहर का दायरा लगभग दोगुना हो गया है। पहले जहां जयपुर शहर का क्षेत्रफल करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर था, अब यह बढ़कर लगभग 6 हजार वर्ग किलोमीटर हो गया है। सरकार का तर्क है कि इस विस्तार से शहर के समग्र विकास को गति मिलेगी और शहरी नियोजन को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण और आबादी को ध्यान में रखते हुए यह कदम आवश्यक था, जिससे भविष्य में बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया जा सके। वहीं, इस फैसले के विरोध में याचिकाकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गांवों को बिना उचित अध्ययन के शामिल करना गलत है और इससे स्थानीय स्तर पर अवैध निर्माण और अव्यवस्था बढ़ सकती है।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से यह भी पूछा है कि इन गांवों के समावेश के पीछे क्या योजना और उद्देश्य था। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक इन गांवों में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक जारी रहेगी।

इस फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि इस बड़े फैसले की दिशा क्या होगी।