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धर्म परिवर्तन मामले में 14 आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज

धर्म परिवर्तन मामले में 14 आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज
 
धर्म परिवर्तन मामले में 14 आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं, जमानत याचिका खारिज

उदयपुर जिले के ऋषभदेव में सामने आए कथित जबरन धर्म परिवर्तन मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपियों को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए तथ्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि इस स्तर पर आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा। इसके बाद सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

यह मामला उदयपुर जिले के ऋषभदेव क्षेत्र में कथित तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों से जुड़ा है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और आरोपों की प्रकृति गंभीर है। ऐसे में आरोपियों को जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपियों को राहत देने की मांग करते हुए जमानत का आग्रह किया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सभी 14 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे। मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में नियमानुसार जारी रहेगी। इस प्रकरण पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है और कोर्ट के इस आदेश को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ आरोप तय होना नहीं है। मामले में अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अदालत में होने वाली विस्तृत सुनवाई के आधार पर ही होगा।