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पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को अवमानना नोटिस

पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को अवमानना नोटिस
 
पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को अवमानना नोटिस

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

यह कार्रवाई पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अदालत के पूर्व आदेशों के बावजूद समय पर चुनाव नहीं कराए गए, जो न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है।

⚖️ किन-किन को नोटिस

हाई कोर्ट ने इस मामले में राजेश्वर सिंह (राज्य निर्वाचन आयुक्त), राज्य चुनाव आयोग और आयोग के सचिव को नोटिस जारी किया है। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है कि आखिर चुनाव कराने में देरी क्यों हुई।

📢 अदालत की सख्ती

सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समय पर चुनाव कराना अत्यंत आवश्यक है। इसमें देरी न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि जनता के अधिकारों पर भी असर डालती है।

🏛️ लोकतंत्र पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में देरी से स्थानीय स्तर पर विकास कार्य प्रभावित होते हैं और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ती है।

🔍 अब सबकी नजर जवाब पर

फिलहाल इस मामले में राज्य चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि देरी के पीछे क्या कारण रहे और आगे चुनाव कब तक कराए जाएंगे।

यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए अहम बन गया है, जो आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।