जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ाई पर हाईकोर्ट सख्त, वायरल वीडियो में देंखे झालावाड़ हादसे के बाद भी लापरवाही पर जताई कड़ी नाराजगी
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद भी प्रदेश में जर्जर भवनों में स्कूलों का संचालन जारी रहने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक जैन की खंडपीठ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि विभाग के अधिकारी “आग से नहीं खेलें” और बच्चों की जान के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित करने पर पहले ही पूरी तरह से रोक लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद बूंदी जिले के भैंसखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने की घटना सामने आना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि जब स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तब इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया और शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। अदालत ने शिक्षा सचिव के साथ-साथ प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को 2 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी यह बताएं कि आखिर जर्जर भवनों की पहचान और उनमें पढ़ाई बंद करने के लिए क्या कदम उठाए गए और किन कारणों से ऐसे भवनों में अब भी स्कूल संचालित हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बार-बार चेतावनी और आदेशों के बावजूद यदि प्रशासन लापरवाही बरत रहा है, तो यह बेहद गंभीर विषय है। अदालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की ढिलाई सीधे तौर पर उनकी जान को खतरे में डाल सकती है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि हाल ही में झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर कई दावे किए गए थे। हालांकि, बूंदी में जर्जर स्कूल की छत गिरने की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है। यह सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर निरीक्षण और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।
हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति का आकलन कर ठोस कदम उठाने होंगे। अदालत ने कहा कि जहां भी स्कूल भवन असुरक्षित हैं, वहां तुरंत कक्षाएं बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अब सभी की नजरें 2 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां शीर्ष अधिकारियों को अदालत के सामने जवाब देना होगा। माना जा रहा है कि इस मामले में हाईकोर्ट का रुख आगे और भी सख्त हो सकता है, जिससे प्रदेशभर के स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
