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राज्यसभा में CAPF बिल पर जोरदार बहस, विपक्ष ने चयन समिति को भेजने की मांग की

राज्यसभा में CAPF बिल पर जोरदार बहस, विपक्ष ने चयन समिति को भेजने की मांग की
 
राज्यसभा में CAPF बिल पर जोरदार बहस, विपक्ष ने चयन समिति को भेजने की मांग की

राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े विधेयक पर तीखी बहस देखने को मिली। सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष ने बिल को लेकर कई आपत्तियां उठाईं और इसे विस्तृत समीक्षा के लिए चयन समिति (Select Committee) को भेजने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान बिल में कई खामियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को लेकर स्पष्टता की कमी है, जिससे भविष्य में व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। खरगे ने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी कानून को और विस्तार से विचार-विमर्श के बाद ही पारित किया जाना चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार को जल्दबाजी करने के बजाय सभी पक्षों की राय लेकर बिल को और मजबूत बनाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने विधेयक को चयन समिति के पास भेजने की औपचारिक मांग रखी, ताकि उसमें आवश्यक संशोधन और सुधार किए जा सकें।

चर्चा के दौरान गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सरकार की ओर से जवाब दिया और विधेयक के प्रावधानों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह बिल सुरक्षा बलों के कामकाज को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि इससे CAPF की कार्यक्षमता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार होगा।

हालांकि, गृह राज्यमंत्री के जवाब के बाद भी विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा। मल्लिकार्जुन खरगे ने दोबारा हस्तक्षेप करते हुए पांच प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति जताई और कहा कि इन मुद्दों पर गहन चर्चा जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि जब तक इन चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक बिल को चयन समिति को भेजना उचित होगा।

सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए गरमा गई। हालांकि, बाद में चर्चा को आगे बढ़ाया गया।

गौरतलब है कि CAPF से संबंधित यह विधेयक सुरक्षा बलों के ढांचे, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक सुधारों से जुड़ा हुआ है, जिसे सरकार महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देख रही है। वहीं विपक्ष इसे और व्यापक समीक्षा की आवश्यकता वाला प्रस्ताव बता रहा है।

कुल मिलाकर, राज्यसभा में CAPF बिल को लेकर हुई यह बहस एक बार फिर इस बात को दर्शाती है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहन विचार-विमर्श और मतभेद बने रहते हैं।