हाईकोर्ट ने 93 बजरी लीज की नीलामी रद्द की, राज्य सरकार को राशि लौटाने और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
राजस्थान के भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर और अजमेर जिलों में हुई 93 बजरी लीज की नीलामी को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला उन परिस्थितियों और शिकायतों के आधार पर लिया है, जिनमें नीलामी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित लीजधारकों की जमा राशि तत्काल लौटाई जाए। इससे पहले कई लीजधारकों ने अपने जमा धन को लेकर शिकायतें की थीं, जिनमें उन्हें नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया की कमी का हवाला दिया गया था।
साथ ही कोर्ट ने पांच साल में बजरी खनन से जुड़े लीज क्षेत्रों की पुनर्भरण रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यह रिपोर्ट चार माह के भीतर तैयार कर प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट में यह दर्शाना होगा कि पिछले पांच वर्षों में इन क्षेत्रों में बजरी खनन के बाद किस प्रकार भूमि का पुनर्भरण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न केवल लीजधारकों के हित में है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और खनन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बजरी खनन में पारदर्शिता, पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय हितों का ध्यान रखना आवश्यक है।
राज्य सरकार के अधिकारी ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार संबंधित लीजधारकों की राशि जल्द ही लौटाई जाएगी और पुनर्भरण रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। अधिकारी ने यह भी कहा कि भविष्य में नीलामी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नीतियों में संशोधन किया जाएगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले से बजरी खनन क्षेत्र में नियमों का पालन करने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सभी पक्षों में जागरूकता बढ़ेगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि किसी भी अनियमित नीलामी या खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम खनन क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदाय के हितों की सुरक्षा के लिए अहम है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन किस समय सीमा में करती है और पुनर्भरण रिपोर्ट के माध्यम से पर्यावरण संतुलन को कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। इस तरह, हाईकोर्ट ने न केवल लीजधारकों के अधिकारों की रक्षा की है, बल्कि राज्य में खनन प्रक्रिया और पर्यावरणीय नियमों के पालन की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
