SI भर्ती रद्द होने पर हनुमान बेनीवाल ने भजनलाल सरकार को घेरा, वायरल वीडियो में देखे क्या बोले RLP प्रमुख
राजस्थान में SI (सार्वजनिक सेवा आयोग) भर्ती परीक्षा के रद्द होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस भर्ती को लेकर जहां एक ओर उम्मीदवारों में निराशा और आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुट गए हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान की भजनलाल सरकार पर जमकर निशाना साधा और इस फैसले को पूरी तरह से निंदनीय करार दिया है।
बेनीवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि, "सरकारी भर्ती परीक्षा को रद्द कर सरकार ने लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया है। यह कांग्रेस सरकार का दोगलापन है, जो न तो युवाओं के रोजगार के लिए ईमानदारी से काम करती है, न ही उनकी उम्मीदों का सम्मान करती है।" उनका यह बयान सीधे तौर पर भजनलाल सरकार की नीति और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
उन्होंने आगे कहा, "राजस्थान में बेरोजगारी पहले ही चरम सीमा पर पहुंच चुकी है और ऐसे में सरकार का यह फैसला युवाओं के लिए और भी मुश्किलें पैदा करेगा। युवाओं ने लाखों रुपये खर्च किए, मेहनत की और परीक्षा दी, लेकिन एक झटके में उनका सपना चूर हो गया। यह सरकार की नाकामी का परिणाम है।" हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल को घेरते हुए कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता केवल वोट बैंक की राजनीति करना बन गई है, जबकि युवाओं के रोजगार के मामले में उनकी नीतियां पूरी तरह से विफल रही हैं।
उम्मीदवारों ने भी इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। राज्यभर के विभिन्न जिलों में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपने गुस्से का इजहार किया। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अभियान छिड़ चुका है, जिसमें विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं ने सरकार से एसआई भर्ती परीक्षा को फिर से आयोजित करने की मांग की है।
राज्य सरकार के इस फैसले ने विपक्षी दलों को भी कड़ा हमला करने का एक और मौका दिया है। हनुमान बेनीवाल ने अपने बयान में कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह आगामी विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री से जवाब मांगेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने इस मामले पर तुरंत कार्यवाही नहीं की तो वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
राजस्थान में युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित होते जा रहे हैं, और ऐसे में इस भर्ती के रद्द होने से उनके लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है। सरकार के लिए यह एक चुनौती होगी कि वह इस मामले को कैसे हल करती है और युवाओं के बीच पैदा हुए इस असंतोष को कैसे शांत करती है।
