आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से चौथी बार मिली जमानत, भक्तो के जोरदार जश्न का वीडियो आया सामने
आजीवन कारावास की सजा काट रहे रेप के दोषी आसाराम बापू को गुजरात हाईकोर्ट ने एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें चौथी बार मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत प्रदान की है। इस जमानत की अवधि 3 सितंबर 2025 तक है।
गौरतलब है कि आसाराम को इससे पहले भी गुजरात हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट से मेडिकल कारणों के चलते अंतरिम जमानत मिल चुकी है। गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें 21 अगस्त तक और राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अगस्त तक अंतरिम जमानत दी थी। अब अदालत ने 3 सितंबर तक उनकी जमानत बढ़ा दी है।
आसाराम बापू को 2018 में बालिका से यौन उत्पीड़न और रेप के मामलों में दोषी करार दिया गया था। इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि, अदालत के आदेश के अनुसार अब वे स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अस्थायी रूप से जेल से बाहर रह सकेंगे।
आसाराम के वकीलों का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर है और उन्हें स्पेशल मेडिकल सुविधाओं की जरूरत है। इस आधार पर उन्होंने कोर्ट से अंतरिम जमानत की मांग की थी। कोर्ट ने वकीलों की दलीलों को मानते हुए उन्हें अस्थायी राहत दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जेलों में पर्याप्त मेडिकल सुविधाओं की कमी के कारण आरोपी कई बार अंतरिम जमानत की मांग करते हैं। अदालत इस दौरान स्वास्थ्य जांच और मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान में रखकर जमानत का फैसला करती है।
हालांकि, सामाजिक संगठन और पीड़ित पक्ष के वकीलों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि गंभीर अपराधियों को बार-बार जमानत देना सामाजिक न्याय और कानून की धारा के खिलाफ हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में अदालतों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े।
गुजरात हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम जमानत केवल चिकित्सीय जांच और इलाज के लिए है और इसके दौरान आसाराम को किसी भी तरह का अपराध करने या प्रभावित करने की अनुमति नहीं है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे उनकी सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करें।
आसाराम बापू की जमानत से जुड़े फैसले हमेशा सार्वजनिक और मीडिया में चर्चा का विषय बने रहते हैं। समाज में ऐसे फैसलों को लेकर हमेशा मतभेद और बहस होती है। इस बार भी न्यायिक प्रक्रिया के इस कदम ने लोगों में चिंता और बहस को जन्म दिया है।
