भीलवाड़ा में पूर्व भाजपा नेता के घर GST इंटेलिजेंस की बड़ी छापेमारी, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें 10 करोड़ की टैक्स चोरी का लगा आरोप
भीलवाड़ा में गुरुवार को भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व यूआईटी चेयरमैन लक्ष्मी नारायण डाड के बेटे के खिलाफ डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने छापेमारी की। छापेमारी 10 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी के आरोप में की गई। सुबह-सुबह जीएसटी इंटेलिजेंस की टीमें लक्ष्मी नारायण डाड के घर पहुंची, जहां से उन्हें पता चला कि टैक्स चोरी का आरोपी निखिल अपने पिता के घर नहीं रहता। इसके बाद टीमें आरोपी के अलग-अलग छह ठिकानों पर पहुंची और वहां जांच शुरू की।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जो टैक्स चोरी की पुष्टि या दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई लगातार जांच और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है। भाजपा नेता और पूर्व यूआईटी चेयरमैन लक्ष्मी नारायण डाड ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें छापेमारी की जानकारी मिली है और वह जांच में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है और सभी तथ्यों की जांच होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी इंटेलिजेंस द्वारा इस तरह की रेड उच्च स्तरीय खुफिया जानकारी और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण पर आधारित होती है। ऐसे मामलों में केवल छापेमारी ही नहीं बल्कि संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच की जाती है। भीलवाड़ा जिले में यह छापेमारी न केवल टैक्स चोरी के मामलों को उजागर करती है, बल्कि यह व्यापारिक और राजनीतिक समुदाय में भी अलर्ट का संकेत देती है। इसके साथ ही यह दिखाता है कि वित्तीय गड़बड़ियों और कर चोरी के मामलों में कानूनी कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी निखिल के ठिकानों पर जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टैक्स चोरी की राशि और उसके स्वरूप का सही अनुमान लगाया जा सकता है। सभी संबंधित दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले से क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन और जीएसटी अनुपालन की दिशा में संदेश जाएगा। यदि टैक्स चोरी के मामले में दोष सिद्ध होता है, तो यह राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
इस घटना ने यह भी दर्शाया कि जीएसटी इंटेलिजेंस की टीमें केवल बड़े व्यापारिक घरानों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों के वित्तीय मामलों की भी जांच करती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि टैक्स अनुपालन और वित्तीय पारदर्शिता सभी के लिए समान रूप से लागू है।
