गोडावण संरक्षण में बड़ी सफलता, जैसलमेर में 3 नए चूजों का जन्म; वीडियो में जाने संख्या बढ़कर 94 पहुंची
राजस्थान के राजकीय पक्षी Great Indian Bustard (गोडावण) को बचाने के प्रयासों में एक बड़ी और उत्साहजनक सफलता सामने आई है। सीमावर्ती जैसलमेर जिले में चल रहे संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम के तहत तीन नए चूजों का जन्म हुआ है, जिससे इस अत्यंत दुर्लभ पक्षी के संरक्षण अभियान को नई ऊर्जा मिली है।इनमें से एक चूजा उस अंडे से जन्मा है जिसे जंगल से सुरक्षित तरीके से संरक्षण केंद्र में लाया गया था। वहीं दो अन्य चूजों का जन्म आधुनिक तकनीक “आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन” के जरिए हुआ है, जिसे गोडावण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।
इस सफलता की जानकारी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 26 चूजों का जन्म हो चुका है, जो इस संरक्षण कार्यक्रम की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।Ministry of Environment, Forest and Climate Change की निगरानी में चल रहे इस प्रोजेक्ट के तहत संरक्षण केंद्रों में गोडावण की कुल संख्या अब बढ़कर 94 हो गई है। विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा यह कार्यक्रम इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों में से एक माना जा रहा है।
गोडावण को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति (Critically Endangered) की श्रेणी में रखा गया है और इसके प्राकृतिक आवास में लगातार कमी, बिजली लाइनों और मानव गतिविधियों के कारण इसकी संख्या तेजी से घटती गई है। ऐसे में कृत्रिम प्रजनन और सुरक्षित अंडा संरक्षण जैसे प्रयास इसके अस्तित्व को बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जैसलमेर में चल रहा यह प्रजनन कार्यक्रम न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। यदि इसी तरह सफलता मिलती रही तो आने वाले वर्षों में गोडावण की आबादी को स्थिर करने की दिशा में बड़ी उम्मीद जगी है। फिलहाल इस नई उपलब्धि ने संरक्षण अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों और वन विभाग की टीम में उत्साह बढ़ा दिया है, और इसे इस दुर्लभ पक्षी के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
