पैरोल पर सरकार का विरोध: गुजरात में भी दर्ज है मामला, दोषसिद्धि का हवाला देकर रिहाई का किया विरोध
राजस्थान सरकार ने एक दोषी कैदी की पैरोल याचिका का विरोध करते हुए अदालत में महत्वपूर्ण तर्क पेश किए हैं। सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14(ए) का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित कैदी के खिलाफ राजस्थान के अलावा गुजरात में भी आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर की अदालत उसे दोषी ठहरा चुकी है। ऐसे में उसे पैरोल का लाभ नहीं दिया जा सकता। सरकार ने अदालत को बताया कि पैरोल नियमों के तहत ऐसे मामलों में रिहाई पर स्पष्ट प्रतिबंध का प्रावधान है। इसलिए दोषी की पैरोल याचिका खारिज किए जाने की मांग की गई।
नियम 14(ए) का दिया हवाला
सरकार की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14(ए) के अनुसार, यदि किसी कैदी के खिलाफ अन्य राज्य में भी आपराधिक मामला हो या वह किसी अन्य मामले में दोषसिद्ध हो, तो यह पैरोल देने के निर्णय में महत्वपूर्ण आधार बनता है।इसी नियम के तहत सरकार ने संबंधित कैदी की रिहाई का विरोध किया।
गुजरात की अदालत से भी दोषसिद्ध
सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ राजस्थान के अलावा गुजरात में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज है। इतना ही नहीं, गांधीनगर की सक्षम अदालत उसे उस मामले में दोषी ठहरा चुकी है।सरकार का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में पैरोल दिए जाने से नियमों का उल्लंघन होगा।
पैरोल पर अंतिम फैसला अदालत करेगी
सरकार ने अपने जवाब में पैरोल याचिका को निरस्त करने की मांग की है। अब मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत अंतिम निर्णय देगी।पैरोल से जुड़े मामलों में अदालत कैदी के आचरण, अपराध की प्रकृति, कानूनी प्रावधानों और सरकार की रिपोर्ट सहित सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाती है।
