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सोनिया गांधी की किताब पर गहलोत का बड़ा आरोप, बोले- बोलने की आजादी को बैन करना चाहती है सरकार

 
सोनिया गांधी की किताब पर गहलोत का बड़ा आरोप, बोले- बोलने की आजादी को बैन करना चाहती है सरकार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी की आगामी किताब को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने दावा किया कि सोनिया गांधी की किताब दुनिया के दूसरे देशों में प्रकाशित होगी, लेकिन भारत में इसके प्रकाशन को लेकर अड़चन पैदा की जा रही है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।

सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब यह खबर सामने आई कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इसका प्रकाशन नहीं करेगा। इससे पहले किताब के 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने की घोषणा की गई थी।

गहलोत ने आरोप लगाया कि किताब के कुछ हिस्सों को हटाने या उनमें बदलाव करने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक, इन हिस्सों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और चीन से जुड़े विषय शामिल थे। गहलोत ने सवाल उठाया कि अगर किताब दुनिया के दूसरे हिस्सों में प्रकाशित हो सकती है तो भारत में इसके प्रकाशन को लेकर ऐसी स्थिति क्यों बनी।

गहलोत ने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अपने जीवन के अनुभव और विचार लिखने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने सोनिया गांधी के सार्वजनिक जीवन की भी सराहना की और कहा कि उनका जीवन त्याग और सेवा की मिसाल रहा है।

हालांकि, इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गहलोत ने खुद माना है कि उन्होंने सोनिया गांधी की पांडुलिपि नहीं पढ़ी है और न ही इस मुद्दे पर उनसे सीधे बातचीत की है। इसलिए उनके द्वारा बताए गए कथित अंशों और बदलावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पेंगुइन ने क्या कहा?

वहीं पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बीच सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि वह भारत में सोनिया गांधी की किताब की प्रकाशक नहीं है। पेंगुइन ने यह भी कहा कि लेखकों के साथ तथ्य-जांच करना और उन्हें संपादकीय सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। कंपनी ने इस बात से इनकार किया कि लेखिका द्वारा संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं करने के कारण उसने किताब प्रकाशित करने से फैसला किया।

पेंगुइन ने यह भी कहा कि वह किताब प्रकाशित करने को लेकर इच्छुक थी, लेकिन लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर वह आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगी। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर किन अंशों में बदलाव की मांग की गई थी और उसके पीछे वास्तव में क्या कारण था।

इस विवाद के बीच सोनिया गांधी की किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर अब नई संभावनाएं बन रही हैं। ऐसे में गहलोत के आरोपों और पेंगुइन की सफाई के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ रही है, जबकि प्रकाशक इसे सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।