राजस्थान में फर्जी डॉक्टरों के गिरोह का भंडाफोड़, वीडियो में जाने 8वीं पास आरोपी ने 4 साल काम करने के बाद खरीद लिया अस्पताल; मरीजों के ऑपरेशन भी करने लगा
राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी के आठवीं पास होने की बात सामने आई है। आरोप है कि उसने करीब चार साल तक जिस अस्पताल में काम किया, बाद में उसी अस्पताल को खरीद लिया और डॉक्टरों के साथ मरीजों के ऑपरेशन भी करने लगा। मामले में एसओजी ने सात अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद एफआईआर दर्ज की है।एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, जांच के दौरान फर्जी MBBS डिग्री और गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स में डिप्लोमा के आधार पर डॉक्टर बनने वाले लोगों के गिरोह का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीकर निवासी पंकज यादव और जालोर निवासी नानजी राम चौधरी के रूप में हुई है।
हरियाणा और राजस्थान से पकड़े गए दोनों आरोपी
एसओजी ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया, जबकि नानजी राम चौधरी को जालोर जिले के रानीवाड़ा से पकड़ा गया। पुलिस अब दोनों आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता, कथित फर्जी डिग्रियों और अस्पतालों में उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहे थे। एसओजी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी डिग्रियां कहां से तैयार कराई गईं और इनके जरिए कितने लोगों ने डॉक्टर के रूप में काम किया।
आठवीं पास आरोपी ने अस्पताल ही खरीद लिया
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पंकज यादव से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि वह आठवीं पास होने के बावजूद चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा था। उसने जिस अस्पताल में करीब चार साल तक काम किया, बाद में उसी अस्पताल को खरीद लिया।इसके बाद उसके डॉक्टरों के साथ मरीजों के ऑपरेशन करने की बात भी सामने आई है। यदि जांच में ये आरोप साबित होते हैं, तो यह मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों में नियुक्ति के दौरान शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ी गंभीर चूक होगी।हालांकि, अस्पताल खरीदने और ऑपरेशन करने से संबंधित रोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और आधिकारिक दस्तावेजों से होनी बाकी है।
सात अन्य लोगों के खिलाफ भी FIR
एसओजी ने इस मामले में सात अन्य कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ भी नामजद एफआईआर दर्ज की है। इनमें शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और राम किशोर महावर के नाम शामिल हैं।जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन लोगों ने किन दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में काम किया और कथित गिरोह के बीच क्या संबंध थे। साथ ही, फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल से जुड़े दूसरे मामलों की भी जांच की जा सकती है।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
डॉक्टर बनने के लिए निर्धारित चिकित्सा शिक्षा और मान्यता प्राप्त योग्यता जरूरी होती है। फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज करने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है, खासकर तब जब मामला सर्जरी या गर्भावस्था से जुड़ी चिकित्सा सेवाओं का हो।राजस्थान में इस कथित गिरोह के खुलासे के बाद अस्पतालों में डॉक्टरों की डिग्री और पंजीकरण की जांच का मुद्दा फिर चर्चा में है। एसओजी की कार्रवाई के बाद अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपियों ने कितने समय तक चिकित्सा सेवाएं दीं, किन संस्थानों में काम किया और उनके इलाज से किसी मरीज को नुकसान पहुंचा या नहीं।फिलहाल, दो आरोपियों की गिरफ्तारी और सात अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर के बाद एसओजी मामले की आगे की जांच कर रही है।
