कोटा के सरकारी अस्पताल में फर्जीवाड़े का आरोप: 86 साल की महिला घर पर आराम करती मिलीं, रिकॉर्ड में भर्ती दिखाकर 15 हजार के तीन इंजेक्शन चढ़ाए
राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी एमबीएस अस्पताल में मरीज के इलाज से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि 86 साल की रामकन्या देवी के नाम पर 5-5 हजार रुपए कीमत के तीन ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन लगाए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है, जबकि महिला अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुई थीं। अस्पताल के दस्तावेजों में महिला को अब भी भर्ती बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल के रिकॉर्ड और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल के रिकॉर्ड में रामकन्या देवी का पंजीयन नंबर 120726298143657 दर्ज है। दस्तावेजों में उनके नाम पर तीन ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत करीब 5 हजार रुपए बताई गई है। इस हिसाब से तीन इंजेक्शनों की कुल कीमत 15 हजार रुपए होती है।
अस्पताल के वार्ड में नहीं मिलीं बुजुर्ग महिला
मामले की जानकारी मिलने पर गुरुवार को भास्कर रिपोर्टर ने पहले एमबीएस अस्पताल के संबंधित वार्ड में जाकर पड़ताल की। वहां रामकन्या देवी भर्ती नहीं मिलीं। इसके बाद रिपोर्टर उनके घर पहुंचा, जहां 86 वर्षीय महिला आराम करती हुई मिलीं।
अस्पताल में भर्ती होने के संबंध में पूछे जाने पर रामकन्या देवी ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन सालों में वह कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुईं। महिला के इस बयान और अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के बीच अंतर होने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन को लेकर सवाल
ह्यूमन एल्बुमिन एक चिकित्सकीय उत्पाद है, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर मरीज की स्थिति और जरूरत के अनुसार करते हैं। ऐसे इंजेक्शनों का वितरण और इस्तेमाल अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जाना चाहिए। इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि रामकन्या देवी के नाम पर इंजेक्शन जारी किए गए थे या नहीं और रिकॉर्ड में उन्हें लगाए जाने की एंट्री किस आधार पर की गई।
जांच में संबंधित मरीज की फाइल, भर्ती रजिस्टर, दवा वितरण रिकॉर्ड और इंजेक्शन जारी करने से जुड़े दस्तावेज अहम हो सकते हैं। इन रिकॉर्डों का मिलान करने से यह स्पष्ट हो सकता है कि दवाओं का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और मरीज के नाम पर एंट्री कैसे दर्ज की गई।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि जब महिला के अनुसार वह अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुईं, तो अस्पताल के रिकॉर्ड में उन्हें भर्ती क्यों दिखाया जा रहा है। साथ ही, उनके नाम पर तीन महंगे इंजेक्शन लगाने की एंट्री किसने की और क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक चूक या जानबूझकर की गई गड़बड़ी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि किसी तरह की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
